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रविवार, 3 मई 2026
शनिवार, 26 फ़रवरी 2022
मुरादाबाद के साहित्यकार स्मृतिशेष शिव नारायण भटनागर साकी की कविता ---दीप शिखा जलती रहती है ....।उनकी यह रचना प्रकाशित हुई है साप्ताहिक मुरादाबाद वाणी के मंगलवार 4 नवम्बर 1969 के अंक में।मुरादाबाद से प्रकाशित होने वाले इस पत्र के प्रधान संपादक धर्मात्मा सरन और सम्पादक वैद्य विष्णुकांत जैन थे ।-
शनिवार, 20 जून 2020
मुरादाबाद के साहित्यकार शिव नारायण भटनागर साकी की रचना -- 'रुक नहीं सकता कभी बढ़ता हुआ यह कारवां ' । यह रचना उन्होंने अपने छात्र जीवन के दौरान उस समय लिखी थी जब वह बीए द्वितीय वर्ष के छात्र थे । उनकी यह रचना 54 साल पहले केजीके स्नातकोत्तर महाविद्यालय मुरादाबाद की वार्षिक पत्रिका के अंक 16( 1965- 66) में प्रकाशित हुई थी।
शनिवार, 9 मई 2020
मुरादाबाद के साहित्यकार शिव नारायण भटनागर साकी का गीत-----यह गीत लिया गया है लगभग 53 साल पहले प्रकाशित गीत संकलन 'उन्मादिनी' से । यह संग्रह कल्पना प्रकाशन , कानूनगोयान मुरादाबाद द्वारा सन 1967 में उन्हीं के संपादन में प्रकाशित हुआ था। इस संग्रह में देशभर के 97 साहित्यकारों के श्रृंगारिक गीत संग्रहीत हैं। इसकी भूमिका लिखी है डॉ राममूर्ति शर्मा ने
शुक्रवार, 3 अप्रैल 2020
मुरादाबाद जनपद के मूल निवासी साहित्यकार (वर्तमान में गाजियाबाद निवासी) डॉ कुंअर बेचैन का एक गीत --- यह गीत लिया गया है लगभग 53 साल पहले प्रकाशित गीत संकलन 'उन्मादिनी' से । यह संग्रह कल्पना प्रकाशन , कानूनगोयान मुरादाबाद द्वारा सन 1967 में प्रकाशित हुआ था। श्री शिवनारायण भटनागर साकी के संपादन में प्रकाशित इस संग्रह में देशभर के 97 साहित्यकारों के श्रृंगारिक गीत संग्रहीत हैं। इसकी भूमिका लिखी है डॉ राममूर्ति शर्मा ने
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