राष्ट्रभाषा हिंदी प्रचार समिति लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं
राष्ट्रभाषा हिंदी प्रचार समिति लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं

रविवार, 15 फ़रवरी 2026

मुरादाबाद की साहित्यिक संस्था राष्ट्रभाषा हिन्दी प्रचार समिति की ओर से 14 फरवरी 2026 को काव्य-गोष्ठी का आयोजन

मुरादाबाद की साहित्यिक संस्था राष्ट्रभाषा हिन्दी प्रचार समिति की ओर से रविवार 14 फरवरी 2026 को देश के बलिदानियों को समर्पित काव्य-गोष्ठी का आयोजन किया गया। 

      रामसिंह निशंक द्वारा प्रस्तुत माता सरस्वती की वंदना से आरंभ हुए कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए डॉ. महेश 'दिवाकर' ने कहा ...

आज़ादी की बलिवेदी पर, चढ़ने वालों नमन ! 

नमन! सौ बार नमन! कृतज्ञ अमित है राष्ट्र नित्य, 

करता है सौ-सौ बार नमन। 

 मुख्य अतिथि रघुराज सिंह निश्चल ने कहा...

कीर्तित जिनसे यह धरा-धाम। 

उन वीरों को शत्-शत् प्रणाम। 

 विशिष्ट अतिथि के रूप में ओंकार सिंह ओंकार का कहना था...

मिली स्वतंत्रता देश को, दे-देकर बलिदान। 

वीरों के बलिदान का, मिलकर रखना मान।।

कार्यक्रम का संचालन करते हुए अशोक विद्रोही ने कहा ...

आज शहीदों का दिन आया, 

हम उनका गुणगान करें। 

मिटे यहाँ जो बलिवेदी पर, 

आओ उन्हें प्रणाम करें। 

योगेन्द्र पाल सिंह विश्नोई ने अपने भावों कुछ इस प्रकार व्यक्त किए - जागो-जागो उठो जवानों, राष्ट्र पुकार रहा है।

रामसिंह निशंक के उद्गार थे - 

उन वीर सपूतों को अपना, बारम्बार प्रणाम है। 

भारत को स्वतंत्र कराया, स्वर्णाक्षरों में नाम है। 

 डॉ. मनोज रस्तोगी की अभिव्यक्ति थी - 

अब हम कुछ बड़ा नहीं मांगते 

परमपिता परमेश्वर से 

बस यही हैं चाहते 

कि हर सुबह वह कह सकें

बेटा ! मैं बिल्कुल ठीक हूॅं। 

योगेन्द्र वर्मा व्योम का कहना था - 

अमर शहीदों के लिए, सुबह-दोपहर-शाम। 

नतमस्तक इस देश का, हर पल उन्हें प्रणाम।। 

ऋणी रहेगा उम्रभर, उनका हिन्दुस्तान। 

किया जिन्होंने देश पर, प्राणों को बलिदान।। 

रचना पाठ करते हुए राजीव प्रखर ने कहा - 

माटी तुझे नमन अब, ऊॅंचा है भाल मेरा। 

मन में न कोई बाकी कोई सवाल मेरा। 

शत्रु का काल बनकर, रण को गया था घर से, 

इतिहास में अमर है, मरकर भी लाल मेरा। 

कमल शर्मा का कहना था - 

रह रह कर है दर्द चमकता अब भी मन की आहों में,

वो भी क्या मंजर था, जो आया था क्रूर निगाहों में।

अंत में मुरादाबाद के दिवंगत साहित्यकार रामदत्त द्विवेदी जी को दो मिनट का मौन रखते हुए श्रद्धांजलि अर्पित की गई। राजीव प्रखर ने आभार-अभिव्यक्त किया। 


















सोमवार, 15 सितंबर 2025

मुरादाबाद की साहित्यिक संस्था राष्ट्रभाषा हिन्दी प्रचार समिति द्वारा हिन्दी दिवस 14 सितम्बर 2025 को आयोजित समारोह में साहित्यकार राजीव सक्सेना को 'हिन्दी साहित्य गौरव सम्मान' से किया गया सम्मानित -----------

मुरादाबाद की साहित्यिक संस्था राष्ट्रभाषा हिन्दी प्रचार समिति द्वारा हिन्दी दिवस पर विश्नोई धर्मशाला , लाइनपार में  सम्मान समारोह एवं काव्य-गोष्ठी का आयोजन 14 सितम्बर 2025 को किया गया जिसमें मुरादाबाद के वरिष्ठ रचनाकार  राजीव सक्सेना को संस्था की ओर से 'हिन्दी साहित्य गौरव सम्मान' से अलंकृत किया गया।  सम्मान स्वरूप श्री सक्सेना को अंगवस्त्र, मानपत्र एवं सम्मान राशि प्रदान की गयी। सम्मानित रचनाकार श्री राजीव सक्सेना को प्रदत्त मानपत्र का वाचन प्रशांत मिश्र ने किया। 

      रामसिंह निशंक द्वारा प्रस्तुत माॅं शारदे की वंदना से आरंभ हुए कार्यक्रम की अध्यक्षता डॉ. रमेश यादव 'कृष्ण' ने की। मुख्य अतिथि ओंकार सिंह ओंकार एवं विशिष्ट अतिथि के रूप में डॉ. कृष्ण कुमार नाज़ उपस्थित रहे। कार्यक्रम का संचालन राजीव 'प्रखर' द्वारा किया गया।               सम्मानित साहित्यकार राजीव सक्सेना ने कहा - "हिन्दी की प्रगति का प्रमाण यह है कि उसका  बाजार पर भी सकारात्मक प्रभाव पड़ा है यद्यपि हिन्दी के सम्मुख कुछ भाषा विकृति की समस्या भी है। इसके बावजूद हिन्दी आम व्यक्ति तक लगातार पहुॅंच बना रही है। वर्तमान साहित्यकारों की पीढ़ी का यह दायित्व है कि वह इन विकृतियों को दूर करने के लिए भी प्रयत्नशील रहे। कार्यक्रम के अगले चरण में काव्य-गोष्ठी हुई जिसमें अमर सक्सेना, प्रशांत मिश्र, राजीव प्रखर, रामसिंह निशंक, डॉ मनोज रस्तोगी, हरि प्रकाश शर्मा, विवेक निर्मल, चिरंजीलाल, डॉ. राकेश चक्र, रामगोपाल, योगेन्द्र पाल विश्नोई, डॉ. कृष्ण कुमार नाज़, ओंकार सिंह ओंकार एवं रमेश यादव कृष्ण ने हिन्दी की महिमा गरिमा को दर्शाती काव्यात्मक एवं गद्यात्मक अभिव्यक्ति की। रामसिंह निशंक द्वारा आभार अभिव्यक्ति के साथ कार्यक्रम समापन पर पहुॅंचा।