कुत्ते के खून में ईमानदारी लिखी है। बेईमानी तो रत्ती भर नहीं। वह जिसका है,उसका रहेगा। दूसरे का तो वह हो ही नहीं सकता।
बहुत पहले अमेरिका ने रिसर्च की। एक प्रोडक्ट बनाया। उसने उसको पूरी दुनिया में भेज दिया..."देखो...और बताओ...क्या कमी है? क्या और जोड़ सकते हैं।" वह प्रोडक्ट पूरी दुनिया घूमा। चीन, रूस, फ्रांस, कोरिया आदि। सब ने अपने हिसाब से वेल्यू एडिशन किया। पाकिस्तान कुछ कर नहीं सका। उसने जस का तस फॉरवर्ड कर दिया।
अब बारी भारत की थी। सरदारजी ने उसको हर तरफ से घुमा कर देखा। कभी आगे कभी पीछे। कुछ समझ में नहीं आया। उसने मीटिंग बुलाई...ये इंडिया की नाक का सवाल है। कुछ करो। सबने अपनी राय दी। कोई सलाह सरदारजी को नहीं जमी। तभी एक चौधरी आया..."सरदार! सुन। बेवजह की मगज़मारी न कर? अमेरिका हमसे क्या घणा है कै? चौधरी ने प्रोडक्ट हाथ में लिया। उल्टा किया..".इब मिल गया तोड़! लिख..."मेड इन इंडिया"।
तब फैक्ट चेकिंग का विकल्प नहीं था। लतीफा चल गया। प्रोडक्ट अपना हो गया। अमेरिका चिल्लाता रहा..."मेरा है...मेरा है।" लेकिन सबूत भारत के हक़ में थे। हमारे कवि मित्र तो आए दिन रोते हैं। मेरी रचना चोरी हो गई। दूसरे ने पढ़ दी। वह नीचे लिखते भी है स्वरचित। लेकिन कौन सुनता है?
अपने मियां ग़ालिब भी चिल्लाते रहे, यह नज़्म मेरी है। दूसरा इसको क्यों पढ़ रहा है? शायरों ने गालिब को ही बेदखल कर दिया। ग़ालिब मियां भी उस्ताद थे। उन्होंने अपनी गजलों में ऐसे- ऐसे कठिन जुमले डाले कि सामने वाला चित हो गया। कहते हैं, सुमित्रानंदन पंत ने भी यही किया। हमारे गीतकार साथी ने एक गीत लिखा। गलती से वह सोशल मीडिया पर डाल दिया। कवि सम्मेलन में इससे पहले कि उनका नंबर आता, एक दूसरे कवि ने वही गीत पढ़ दिया। उखाड़ लो पूंछ?
हमारे मेरठ में तो "मेड इन.." जो चाहे ले लो। आज तक कोई पकड़ नहीं सका। वो बनाता ही ऐसा है, जो "मेड इन मेरठ" दिखे। कहीं से कुछ भी ले आओ मेरठ के पास उसकी तोड़ है। मेरठ वेस्ट यूपी की राजधानी है। गलगोटिया भी वेस्ट यूपी में है।
गलगोटिया का मामला शर्मनाक है। डॉग रोबो को हमने कहा...हमारा है। चीन कोरिया ने दावा गलत बता दिया। दरअसल डॉग हमारा था, रोबो उनका।
सिंपल सी बात थी। एआई पर जाते...उससे कहते.. "मुझे एक ओरिजिनल सा दिखने वाला डॉग रोबो बना दो, जो 100% हमारा दिखे। " वह बना देता। आजकल सभी यही कर रहे हैं। हर ट्रेड मार्क नकली है।
हो सकता है, गलगोटिया में कुत्ते का दम घुट रहा हो? वह बाहर आ गया.."मुझे भी पहचान दिलाओ।"
डॉग शब्द अभिजात्य है। यह कारों में घूमता है। कुत्ता देशी है। गली में भोंकता है। श्वान साहित्य में बसता है। हो सकता है डॉग ने ही बगावत कर दी हो... मेरा रोबो कैसे?
पहले से फैक्ट चेक कर लेते तो यह नौबत ना आती। इस डॉग ने सर नीचे कर दिया।
✍️ सूर्यकान्त द्विवेदी, मेरठ





























































