गुरुवार, 23 मार्च 2023

मुरादाबाद के साहित्यकार धन सिंह धनेंद्र की कहानी ..... 'मेरी भी एक माँ थी'


सुनिधि हमेशा अपनी कक्षा के बच्चों को बहुत प्यार करती थी तथा बडे़ मनोयोग से पढा़ती थी। बच्चों के अभिभावक हमेशा उसकी प्रशंसा करते थे। उसका दुर्भाग्य था कि हिंदी और इतिहास विषय से प्रथम श्रेणी की स्नातकोत्तर होने और बीएड होने के बाबजूद वह एक निजी पब्लिक स्कूल में अल्प वेतन भोगी अध्यापिका थी।

       सुनिधि को आज उसकी सेवा समाप्ति के लिए  नोटिस मिला था। इसका उत्तर एक सप्ताह में उसे प्रधानाचार्या को देने के लिए निर्देशित किया गया था । वह हतप्रभ थी कि एकदम से उसके विरुद्ध इतना सख्त निर्णय कैसे लिया जा सकता है?  उसने जो काम किया था उसका वह परिणाम भुगतने को तैयार थी। अधिक से अधिक उससे क्लास छीनी जा सकती थी लेकिन उसकी सेवा समाप्त हो जायेगी यह तो उसके दिमाग में कभी आया ही नहीं था।

        सुनिधि की कक्षा में एक छात्रा पलक थी जो पढ़ने-लिखने में बहुत तेज थी। उसकी माँ का जबसे 'कोरोना' से अचानक निधन हुआ वह बहुत शांत हो चली थी। सुनिधि उसको बहुत प्यार से समझाती और पढा़ई लिखाई में मन लगाने पर जोर देती । उसका काम पूरा नहीं हो पाता तब वह किसी न किसी तरह पलक का काम पूरा कराती रहती थी। पेरेन्टस डे में पहले माँ आया करती थी अब उसके पापा कभी आ जाते तो हाथ बांधे खडे़ सुनते रहते थे। माँ की मृत्यु के बाद पलक को सब काम अपने आप ही करना पड़ता था। पिता का पर्याप्त समय न दे पाना उनकी भी मजबूरी थी।

         पलक की हिंदी की परीक्षा में उसे अपने "सर्वप्रिय व्यक्ति" पर निबंध लिखना था। उसने पहली लाइन लिखी- 

      "मेरी भी एक माँ थी जो दुनिया भर में मुझे सबसे प्यारी थी... "

       उसकी आंखों से आंसुओं की झडी लग गई। आंसू टप-टप उस की कापी में गिरते गए। उसने जो कुछ लिखा था और जो वह आगे लिखने का प्रयास कर रही थी वह सब आंसूओं से गीला होकर खराब होता जा रहा था। उससे लिखा नहीं जा रहा था। जैसे तैसे उसने अपनी परीक्षा दी।  पलक की कापी जब सुनिधि के पास जांचने को आई तो वह पलक की कापी देख कर विचलित हो उठी। कापी में सुनिधि पलक की मनोदशा को अच्छे से पड पा रही थी। 'मां' के विषय में कापी पर कुछ भी स्पष्ट नहीं लिखा होने पर सुनिधि ने जैसे मानो पूरा निबंध पढ़ लिया था। आखिर उसे पलक से विशेष लगाव था। उसकी आंखें नम हो चलीं थीं। उसने पलक को 10 में 10 नम्बर देकर कापी बंद कर दी।

      यही एक दुस्साहस उसने किया था। यह उसका खाली पीरियड था। काफी परेशान सी क्लास में अकेली सुनिधि अपनी ऊंगलियां चटखाती। कभी अपने बालों पर हाथ फेरती। कभी उठ कर इधर-उधर चहल कदमी करती। उसे निर्णय करने में अधिक समय नहीं लगा। एक झटके से अपने पर्स  से  कागज और पेन निकाला और अपना त्यागपत्र लिख कर चपरासी के द्वारा प्रिंसपल को भेज कर वह सीधे अपने घर चली आई।

✍️ धनसिंह 'धनेन्द्र '

श्रीकृष्ण कालोनी, चन्द्र नगर, 

मुरादाबाद 244001

उत्तर प्रदेश, भारत

मुरादाबाद के साहित्यकार अशोक विद्रोही की कहानी .....खुतरी नाशपाती

 


   "..... आप सब लोगों ने  अगर यह देख लिया है तो मैं अब ब्लैक बोर्ड साफ कर दूं?"डाॅ लवानिया सर ने पूछा.

   "हा हा हा हा हा हा" पूरी क्लास हंसी के ठहाकों से गूंज गई....कुछ लोगों ने कहा "हां सर पढ़ लिया है बिगाड़ दीजिए! "

       "तो आओ अब पढ़ाई शुरू करें! " और बाॅटनी की पढ़ाई शुरू हूई बीच-बीच में शरारती लड़के हमेशा की तरह व्यवधान उत्पन्न करते रहे.... परंतु डाॅ लवानिया सर पूरे मनोयोग से पढ़ाने में लगे रहे ..... 

     ....डाॅ लवानिया सर देखने में सांवले खुदरा चेहरा परन्तु आत्मविश्वास से भरे हुए एकदम सरल स्वभाव वाले थे परंतु पढ़ाते बहुत अच्छा थे! गोल्ड मेडलिस्ट थे तो जो पढ़ने वाले बच्चे थे उन्हें बहुत पसंद करते थे और जो आवारागर्दी करने आते थे वे एक गढढों वाली नाशपाती का चेहरा बनाते और उस पर डाॅ यू सी लवानिया लिख देते ऐसा करके वह प्रोफ़ेसर का उपहास करते थे.....! खुराफात करने में सतीश त्यागी और रामप्रसाद मुख्य थे ये दोनों शरारत और गुंडागर्दी करते ही रहते थे दूसरे प्रोफ़ेसर तो प्रिंसिपल से शिकायत कर देते थे घरवालों तक को लेटर लिखवा देते थे यहां तक कि नाम भी कटवा देते थे परंतु डाॅ यूसी लवानिया उनमें से नहीं थे! 

.......एक दिन किसी केस के सिलसिले में सतीश त्यागी और रामप्रसाद को तलाशती हुई पुलिस क्लास में आ पहुँची तब डाॅ यूसी लवानिया क्लास ले रहे थे  परमिशन लेकर पुलिस वाले अंदर आए और पूछा सतीश त्यागी और रामप्रसाद  किस तरह के लड़के हैं गुंडागर्दी करने वाले हैं या शरीफ..!यह बात उन्होंने क्लास में सबके सामने पूछी...... 

सभी सोच रहे थे कि डाॅ यूसी लवानिया आज अपने मन की भड़ास निकाल कर ही दम लेगें..और इन दोनों को फंसा  ही दम लेंगे उन दोनों के चेहरे भी पूरी तरह उतर गए थे कि आज बचने वाले नहीं जेल जाना ही पड़ेगा परंतु ये क्या?....ऐसा नहीं हुआ डाॅ यूसी लवानिया ने कहा " ये दोनों बच्चे मेरी क्लास के सबसे शरीफ छात्र हैं अपना काम हमेशा मन लगाकर करते हैं यह सुनकर पुलिस ने फाइनल रिपोर्ट लगाई रिपोर्ट लगाई और लौट गई अगले दिनों में कई दिनों तक सतीश त्यागी और रामप्रसाद क्लास में नहीं आए....परंतु इस बीच ऐसा हुआ की डाॅ यूसी लवानिया को जापान की किसी यूनिवर्सिटी ने अपने यहां सलेक्ट कर लिया और उनके जाने की खबर पूरे कॉलेज में फैल गई अंतिम दिन डाॅ यूसी लवानिया क्लास में आए रोज की तरह ही क्लास ली और अंत में उन्होंने स्टूडेंट्स से विदा लेते हुए कहा आप लोगो के साथ बहुत सुन्दर समय गुजरा,अब मेरी जाॅब  विदेश में लग गयी है बच्चों मेरा पूरा प्रयास रहा कि मैं अपने प्रत्येक छात्र को ठीक से पढ़ा सकूं परंतु पढ़ाते समय शिक्षक को थोड़ा  सख्त भी होना पड़ता है इस लिए पढाने के दौरान मुझसे जो भी गलती हुई हो उसे क्षमा करना! और आगे भी अपनी पढाई ऐसे ही मन लगा करना....!और जीवन में अपने साथ ही अपने माता पिता का नाम ऊंचा करना! 

    उनका ये कहना था कि सतीश त्यागी एवं राम प्रसाद उनके चरण छूकर फूट फूट कर रो पड़े कक्षा में सभी की आंखे भीगी थीं..... 

✍️ अशोक विद्रोही 

412 प्रकाश नगर

मुरादाबाद 244001

उत्तर प्रदेश, भारत

मोबाइल फोन नंबर 8218825542

सोमवार, 20 मार्च 2023

मुरादाबाद के साहित्यकार योगेंद्र वर्मा व्योम के दो नवगीत





मुरादाबाद के साहित्यकार बाबा संजीव आकांक्षी की कविताएं

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मुरादाबाद के साहित्यकार योगेंद्र पाल सिंह विश्नोई का गीत .. दुनिया की नजरों में आए कितने भेद हमारे मन के .

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रविवार, 19 मार्च 2023

मुरादाबाद मंडल के कुरकावली ( जनपद संभल) निवासी साहित्यकार त्यागी अशोका कृष्णम् के नौ दोहे ......


ऊंची ऊंची फेंकना, दो अब माधव छोड़।

तुमने मटकी प्रेम की,दी कंकर से फोड़।। 1।।


तोड़फोड़ या जोड़ की,बातें कर लो लाख।

हठ जिसने की प्रेम में,मिली उसे बस राख।। 2।।


मैं तुमसे रो-रो कहूं,पांव पकड़कर नाथ।

बरजोरी जमकर करो, किंतु न छोड़ो हाथ।। 3।।


नाथ-साथ,की बात का,क्या जानोगे मर्म।

पग-पग गोपी छेड़ना,रहा तुम्हारा धर्म।। 4।।


 होठों से छू कर मुझे, बढ़ा दीजिए मान।

 बंशी बन करती रहूं, जीवन भर गुणगान ।। 5।।


माधव मेरी अंत में,मन की सुनो पुकार।

निर्मोही जो तुम हुए, डूबोगे मझधार।। 6।।


 माधव अब राधा बनो,जानो मेरी पीर।

आते हो जब स्वप्न में,होती बहुत अधीर।। 7।।


मनमंदिर मोहन बसे,ऊंची सबसे साख।

रूठे जो मुझसे कभी,जली मिलूंगी राख।। 8।।


अज्ञानी बनकर रहो,चाहूं मैं मन मीत।

ज्ञानी बन मत तोड़ना,मुझ से बांधी प्रीत।। 9।।


✍️ त्यागी अशोका कृष्णम्

कुरकावली, संभल 

उत्तर प्रदेश, भारत

शुक्रवार, 17 मार्च 2023

मुरादाबाद की साहित्यकार (वर्तमान में जकार्ता इंडोनेशिया निवासी) वैशाली रस्तोगी की तीन काव्य कृतियों मेरे चारों धाम (दोहा संग्रह), करती खुद को मैं नमन (कविता संग्रह), तथा शुभ-प्रभात (हाइकु संग्रह) का जनपद संभल की साहित्यिक संस्था परिवर्तन ट्रस्ट(पंजी) के तत्वावधान में आयोजित भव्य समारोह में किया गया लोकार्पण

मुरादाबाद  मंडल के जनपद संभल की साहित्यिक  संस्था परिवर्तन ट्रस्ट(पंजी) के तत्वावधान में जकार्ता (इंडोनेशिया) की साहित्यकार वैशाली रस्तोगी की तीन काव्य कृतियों मेरे चारों धाम (दोहा संग्रह), करती खुद को मैं नमन (कविता संग्रह), तथा शुभ-प्रभात (हाइकु संग्रह) का लोकार्पण पर्व एवं साहित्यकार सम्मान समारोह का आयोजन गुरुवार 16 मार्च 2023 को व्हाइट हाउस, बुद्धि विहार दिल्ली रोड मुरादाबाद में किया गया। 

       कार्यक्रम का शुभारंभ माँ सरस्वती के चित्र के समक्ष  दीप प्रज्ज्वलन व पुष्पार्पण करके किया गया। परिवर्तन ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष प्रदीप कुमार "दीप" ने माँ सरस्वती की वंदना प्रस्तुत की तदोपरांत वैशाली रस्तोगी की तीनों पुस्तकों का लोकार्पण कार्यक्रम अध्यक्ष हास्य व्यंग्य के प्रख्यात साहित्यकार डॉ मक्खन मुरादाबादी, विशिष्ट अतिथि चर्चित साहित्यकार  डॉ मनोज रस्तोगी, डॉ पंकज दर्पण अग्रवाल, डॉ अर्चना गुप्ता, संचालक त्यागी अशोका कृष्णम् तथा अश्विनी रस्तोगी के कर कमलों द्वारा संपन्न हुआ। 

       समारोह में  मयंक शर्मा, प्रदीप कुमार "दीप"  दीक्षा सिंह, मोहनी रस्तोगी, साक्षी रस्तोगी,  अणिमा रस्तोगी , अश्वनी रस्तोगी एवं त्यागी अशोका कृष्णम् ने वैशाली रस्तोगी की कविताओं का सुमधुर काव्यपाठ किया।

       प्रख्यात व्यंग्य कवि डॉ मक्खन मुरादाबादी ने वैशाली रस्तोगी को एक होनहार कवयित्री बताते हुए कहा कि उनकी रचनाएं, विदेशी मिट्टी पर अपनी मिट्टी के भाव की उपज हैं। इनमें अपने सांस्कृतिक और संस्कारी प्रवाह के साथ साथ सामाजिक और पारिवारिक रिश्तों की न उधड़ने वाली बुनावट के ताने बाने की प्रगाढ़ झलक अपना रंग भर कर गौरवान्वित हुई है। वैशाली का रहना सहना भले विदेश का है पर उसके भीतर रची बसी धुकर पुकर अपने भारतीय परिवेश की ही है, जिसे उसका संवेदनात्मक मन एक पल के लिए भी नहीं छोड़ता।

      व्यंग्य कवि डॉ मनोज रस्तोगी ने कहा कि वैशाली रस्तोगी ने अपने दोहों के माध्यम से भारतीय सभ्यता, संस्कृति, रीति-रिवाजों एवं परम्पराओं का सरलता के साथ सटीक वर्णन किया है। इसके अतिरिक्त अपनी रचनाओं के माध्यम से वह नारी सशक्तिकरण पर बल देती हैं तो वर्तमान भौतिकतावादी युग में खत्म होती जा रही मानवीय संवेदनाओं और आपसी रिश्ते नातों में बिखराव पर चिंता जताती हैं । शृंगार रस से परिपूर्ण रचनाओं के माध्यम से जहां वह शाश्वत प्रेम और विरह वेदना को अभिव्यक्त करती हैं वहीं सामाजिक विसंगतियों और कुरीतियों पर पैने प्रहार भी करती हैं । 

     साहित्यपीडिया की संस्थापक डॉ अर्चना गुप्ता ने वैशाली रस्तोगी की लेखनी को अपने देश की संस्कृति की खुशबू से लबरेज बताते हुए कहा वह एक लंबे समय से विदेश में रहते हुए भी देश की माटी से जुड़ी हुई हैं। वैश्विक स्तर पर हिंदी जगत में उनकी एक विशिष्ट पहचान है, उनकी रचनाएं आम जनजीवन से जुड़ी हुई हैं।

      अमरोहा की साहित्यकार शशि त्यागी ने वैशाली रस्तोगी के हाइकु भोले नंदन/ शुभगुणकानन/ शुभागमन का उदाहरण देते हुए उनके आध्यात्मिक सृजन की भूरि-भूरि प्रशंसा की।

      वरिष्ठ रंगकर्मी डॉ पंकज दर्पण अग्रवाल ने कहा  "वैशाली रस्तोगी हिदुस्तान के बाहर रहकर भी अपने दिल में हिंदी और हिंदुस्तान के लिए प्रेम एवं समर्पण का सागर भरे हुए हैं।" वरिष्ठ साहित्यकार श्री कृष्ण शुक्ल ने कहा कि वैशाली रस्तोगी के दोहों के केंद्र में भक्ति एवं आध्यात्म है।

        युवा कवि एवं समीक्षक दुष्यंत बाबा ने वैशाली रस्तोगी के सृजन को अध्यात्म, दर्शन, और प्रकृति के साथ साधारणीकरण करते हुए मानवीय संवेदनाओं का स्पर्श करने वाला बताया।

        इस अवसर पर साहित्य, समाज, एवं संस्कृति के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान देने वाले साहित्यकारों, युवाओं एवं नारी शक्ति को सम्मानित किया गया। डॉ. पंकज दर्पण अग्रवाल ने मुरादाबाद सांस्कृतिक समाज संस्था की ओर से वैशाली रस्तोगी का सम्मान करते हुए उन्हें शॉल  और प्रशस्ति पत्र प्रदान किया।

      कार्यक्रम का संचालन संयुक्त रूप से प्रदीप कुमार दीप एवं त्यागी अशोका कृष्णम् के द्वारा किया गया। कार्यक्रम के समापन पर वैशाली रस्तोगी ने मधुर कंठ से अपनी रचनाओं का पाठ करते हुए कार्यक्रम में आए सभी अतिथियों, व साहित्यकारों, का आभार व्यक्त किया। 

       इस अवसर पर अशोक विश्नोई, योगेंद्र वर्मा व्योम, राजीव प्रखर, धवल दीक्षित, अशोक विद्रोही, नकुल त्यागी, वीरेंद्र रस्तोगी, शिखा रस्तोगी, संजय शंखधार आदि मौजूद रहे।


































































































 ::::::::::प्रस्तुति:::::::::

त्यागी अशोका कृष्णम्

संस्थापक अध्यक्ष

परिवर्तन ट्रस्ट (पंजी) 

कुरकावली, संभल

उत्तर प्रदेश, भारत