शुक्रवार, 23 जनवरी 2026

मुरादाबाद की साहित्यिक संस्था 'हरसिंगार' की ओर से वसंत पंचमी की पूर्व संध्या पर 22 जनवरी 2026 को काव्य गोष्ठी का आयोजन

मुरादाबाद की साहित्यिक संस्था 'हरसिंगार' की ओर से नवगीतकार स्मृतिशेष माहेश्वर तिवारी जी के गौड़ ग्रेशियस स्थित आवास पर वसंत पंचमी एवं निराला जयंती की पूर्व संध्या पर काव्य गोष्ठी का आयोजन किया गया । कार्यक्रम का शुभारंभ सुप्रसिद्ध संगीतज्ञा बालसुंदरी तिवारी द्वारा महाकवि निराला के अमर वसंत गीत- "सखि वसंत आया..." तथा नवगीतकार स्व.माहेश्वर तिवारी के गीत-"यह पीले कुरते सा दिन, नारंगी पगड़ी सी शाम, आजा कर दूं तेरे नाम" की प्रस्तुति से किया गया। काव्य गोष्ठी की अध्यक्षता करते हुए बाल सुंदरी तिवारी ने अपनी काव्य रचना भी प्रस्तुत की।

मुख्य अतिथि डॉ. कृष्ण कुमार नाज ने कहा ....

दीपों की झिलमिल पर बैठे घोर अँधेरों के पहरे हैं। 

बात बहुत साधारण-सी है लेकिन अर्थ बड़े गहरे हैंं। 

विशिष्ट अतिथि डॉ. प्रेमवती उपाध्याय के शब्द थे - 

जब तुम आत्मसात्  हो जाते,

 बदला-बदला जग लगता है। 

विशिष्ट अतिथि डॉ.अर्चना गुप्ता ने कहा ...

जरा विचारों लक्ष्मण कैसे, काटा ये विरही जीवन 

दरवाजे पर नज़र टिकाये, बैठी रही लिये बस तन। 

भूल गई थी पलक झपकना, सिर्फ जोहती बाट रही, 

छोड़ गये तुम बीच राह में, भूल गये क्यों सभी वचन। 

विशिष्ट अतिथि डॉ. माधुरी सिंह ने अपनी अभिव्यक्ति में कहा - 

अनंत अज्ञात है या फिर अज्ञात ही अनंत है, 

किन्तु हर किसी का अज्ञात अपना अपना है

 इसलिए अनंत भी कोई प्यार ढूंढ रहा है। 

 संचालन  करते हुए योगेन्द्र वर्मा 'व्योम' ने वासंती उल्लास में सभी को इस प्रकार डुबोया -

 महकी धरती देखकर, पहने अर्थ तमाम। 

पीली सरसों ने लिखा, ख़त वसंत के नाम।। 

आये मन के पेड़ पर, सुख के नूतन पात। 

उम्मीदों ने आज की, जब वसंत की बात।। 

 श्रीकृष्ण शुक्ल ने कहा - 

जीवन भर सँग सँग चलती है, 

आशा और निराशा। 

सुख.दुख से ही रची गई है, 

जीवन की परिभाषा।। 

डॉ. मनोज रस्तोगी अपने भावों को शब्द देते हुए कहा - 

दाऊ दयाल खन्ना को जब, 

त्यागी दिनेश का साथ मिला। 

मुरादाबाद की पावन धरती पर , 

तब विचार का एक दीप जला।। 

यहीं से जन्मा वह आंदोलन , 

जिसने युग का भाग्य लिखा। 

श्रीराम जन्मभूमि मुक्ति का, 

शंखनाद होता यहीं दिखा।। 

काव्य पाठ करते हुए राजीव प्रखर की अभिव्यक्ति थी - 

सोच रहा हूॅं बैठ अकेला, कोई तो मुझसे बतियाए । 

भावों का यह सागर गहरा, मिलकर शब्दों से लहराये ।

 प्रस्तर जैसे अन्तर्मन में, मैं मधुमासी प्रीत लिखूंगा। 

पायल से कर दो तुम छम-छम, मैं उस पर ही गीत लिखूंगा । 

मनोज मनु ने इस प्रकार अपने भावों को शब्द दिये - 

राम ही संकल्प पावन , राम का वंन्दन करें;  

पूर्ण  अभिलाषा हुई सब,  आओ ! अभिनन्दन करें।

 मीनाक्षी ठाकुर ने वसंत का चित्र कुछ इस प्रकार खींचा - 

पीली सरसों नाच रही है मस्त मगन बिन साज के। 

पीत- वसन,सुरभित आभूषण ठाठ बड़े ऋतुराज के।। 

 मयंक शर्मा ने कहा - 

एक सुखद एहसास हो तुम। 

हर सम्बन्ध में खास हो तुम।। 

जीवन घोर निराशा तम में। 

चमकीली सी आस हो तुम।।

 दुष्यंत बाबा ने प्रभु श्रीराम की भक्ति से सराबोर करते हुए कहा। - 

जो  रटता  है राम  को, उसको रटते राम। 

मिलता सुख बैकुंठ का, घर में चारों धाम।। 





















सोमवार, 19 जनवरी 2026

मुरादाबाद के साहित्यकार रामदत्त द्विवेदी का देहावसान






मुरादाबाद के वयोवृद्ध साहित्यकार एवं साहित्यिक संस्था हिन्दी साहित्य संगम के अध्यक्ष रामदत्त द्विवेदी का रविवार 18 जनवरी 2026 की सुबह देहावसान हो गया। वह 90 वर्ष के थे और पिछले कुछ समय से अस्वस्थ थे। अपने पीछे वह दो पुत्रों और एक पुत्री का भरा पूरा परिवार रोता बिलखता छोड़ गए। उनका अंतिम संस्कार लोकोशेड स्थित मोक्ष धाम में किया गया।

     साहित्यिक मुरादाबाद के संस्थापक अध्यक्ष डॉ मनोज रस्तोगी ने बताया कि 30 जून 1937 को रामपुर की तहसील शाहबाद में पंडित गोपाल दत्त द्विवेदी एवं कैलाशो देवी के सुपुत्र के रूप में जन्में रामदत्त द्विवेदी आजीवन हिन्दी साहित्य के प्रति समर्पित भाव से सक्रिय रहे। उनकी दो काव्य-कृतियां 'हम अंधेरों को मिटायें' और 'खुद को बदलना होगा' प्रकाशित हो चुकी हैं। उन्हें साहित्यिक मुरादाबाद की ओर से  राजेन्द्र मोहन शर्मा श्रृंग' स्मृति सम्मान, आदर्श कला संगम द्वारा माहेश्वर तिवारी सम्मान, कला भारती द्वारा कला श्री तथा सरस्वती परिवार द्वारा काव्य भूषण सम्मान से सम्मानित किया जा चुका है।

     उनकी अंतिम यात्रा रविवार को उनके मिलन विहार स्थित आवास से प्रारम्भ हुई। लोकोशेड स्थित मोक्षधाम में उनके पार्थिव शरीर को उनके सुपुत्र प्रतीत कुमार शर्मा  ने मुखाग्नि दी। महानगर के साहित्यकारों ओंकार सिंह, रघुराज सिंह निश्छल, डॉ महेश दिवाकर, अशोक विद्रोही,  वीरेंद्र सिंह बृजवासी, राम सिंह निशंक, राजीव प्रखर, दुष्यन्त बाबा, जितेंद्र सिंह जौली, मनोज व्यास,  मयंक शर्मा, अनुराग मेहता, मनोज मनु, अमर सक्सेना, नकुल त्यागी, डॉ कृष्ण कुमार नाज, उदय अस्त, समीर तिवारी, संजीव आकांक्षी समेत अनेक गणमान्य नागरिकों ने उन्हें अश्रुपूरित नेत्रों से अंतिम विदाई दी। 

    महानगर की साहित्यिक संस्थाओं मुरादाबाद लिटरेरी क्लब, साहित्यपीडिया, राष्ट्रभाषा हिन्दी प्रचार समिति, हस्ताक्षर, अंतरा, हरसिंगार, कला भारती, उर्दू सहित्य शोध केंद्र, विजयश्री वेलफेयर सोसाइटी, अल्फाज अपने, साहित्यिक मुरादाबाद, हिन्दी साहित्य संगम, संस्कार भारती, जैमिनी साहित्य फाउंडेशन, अखिल भारतीय साहित्य कला मंच, काव्य धारा, गुंजन प्रकाशन आदि ने उनके देहावसान पर शोक व्यक्त किया है ।