मुरादाबाद की साहित्यिक संस्था 'हरसिंगार' की ओर से नवगीतकार स्मृतिशेष माहेश्वर तिवारी जी के गौड़ ग्रेशियस स्थित आवास पर वसंत पंचमी एवं निराला जयंती की पूर्व संध्या पर काव्य गोष्ठी का आयोजन किया गया । कार्यक्रम का शुभारंभ सुप्रसिद्ध संगीतज्ञा बालसुंदरी तिवारी द्वारा महाकवि निराला के अमर वसंत गीत- "सखि वसंत आया..." तथा नवगीतकार स्व.माहेश्वर तिवारी के गीत-"यह पीले कुरते सा दिन, नारंगी पगड़ी सी शाम, आजा कर दूं तेरे नाम" की प्रस्तुति से किया गया। काव्य गोष्ठी की अध्यक्षता करते हुए बाल सुंदरी तिवारी ने अपनी काव्य रचना भी प्रस्तुत की।
मुख्य अतिथि डॉ. कृष्ण कुमार नाज ने कहा ....
दीपों की झिलमिल पर बैठे घोर अँधेरों के पहरे हैं।
बात बहुत साधारण-सी है लेकिन अर्थ बड़े गहरे हैंं।
विशिष्ट अतिथि डॉ. प्रेमवती उपाध्याय के शब्द थे -
जब तुम आत्मसात् हो जाते,
बदला-बदला जग लगता है।
विशिष्ट अतिथि डॉ.अर्चना गुप्ता ने कहा ...
जरा विचारों लक्ष्मण कैसे, काटा ये विरही जीवन
दरवाजे पर नज़र टिकाये, बैठी रही लिये बस तन।
भूल गई थी पलक झपकना, सिर्फ जोहती बाट रही,
छोड़ गये तुम बीच राह में, भूल गये क्यों सभी वचन।
विशिष्ट अतिथि डॉ. माधुरी सिंह ने अपनी अभिव्यक्ति में कहा -
अनंत अज्ञात है या फिर अज्ञात ही अनंत है,
किन्तु हर किसी का अज्ञात अपना अपना है
इसलिए अनंत भी कोई प्यार ढूंढ रहा है।
संचालन करते हुए योगेन्द्र वर्मा 'व्योम' ने वासंती उल्लास में सभी को इस प्रकार डुबोया -
महकी धरती देखकर, पहने अर्थ तमाम।
पीली सरसों ने लिखा, ख़त वसंत के नाम।।
आये मन के पेड़ पर, सुख के नूतन पात।
उम्मीदों ने आज की, जब वसंत की बात।।
श्रीकृष्ण शुक्ल ने कहा -
जीवन भर सँग सँग चलती है,
आशा और निराशा।
सुख.दुख से ही रची गई है,
जीवन की परिभाषा।।
डॉ. मनोज रस्तोगी अपने भावों को शब्द देते हुए कहा -
दाऊ दयाल खन्ना को जब,
त्यागी दिनेश का साथ मिला।
मुरादाबाद की पावन धरती पर ,
तब विचार का एक दीप जला।।
यहीं से जन्मा वह आंदोलन,
जिसने युग का भाग्य लिखा।
श्रीराम जन्मभूमि मुक्ति का,
शंखनाद होता यहीं दिखा।।
काव्य पाठ करते हुए राजीव प्रखर की अभिव्यक्ति थी -
सोच रहा हूॅं बैठ अकेला, कोई तो मुझसे बतियाए ।
भावों का यह सागर गहरा, मिलकर शब्दों से लहराये ।
प्रस्तर जैसे अन्तर्मन में, मैं मधुमासी प्रीत लिखूंगा।
पायल से कर दो तुम छम-छम, मैं उस पर ही गीत लिखूंगा ।
मनोज मनु ने इस प्रकार अपने भावों को शब्द दिये -
राम ही संकल्प पावन , राम का वंन्दन करें;
पूर्ण अभिलाषा हुई सब, आओ ! अभिनन्दन करें।
मीनाक्षी ठाकुर ने वसंत का चित्र कुछ इस प्रकार खींचा -
पीली सरसों नाच रही है मस्त मगन बिन साज के।
पीत- वसन,सुरभित आभूषण ठाठ बड़े ऋतुराज के।।
मयंक शर्मा ने कहा -
एक सुखद एहसास हो तुम।
हर सम्बन्ध में खास हो तुम।।
जीवन घोर निराशा तम में।
चमकीली सी आस हो तुम।।
दुष्यंत बाबा ने प्रभु श्रीराम की भक्ति से सराबोर करते हुए कहा। -
जो रटता है राम को, उसको रटते राम।
मिलता सुख बैकुंठ का, घर में चारों धाम।।




























