मुरादाबाद की साहित्यिक संस्था राष्ट्रभाषा हिन्दी प्रचार समिति की ओर से रविवार 14 फरवरी 2026 को देश के बलिदानियों को समर्पित काव्य-गोष्ठी का आयोजन किया गया।
रामसिंह निशंक द्वारा प्रस्तुत माता सरस्वती की वंदना से आरंभ हुए कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए डॉ. महेश 'दिवाकर' ने कहा ...
आज़ादी की बलिवेदी पर, चढ़ने वालों नमन !
नमन! सौ बार नमन! कृतज्ञ अमित है राष्ट्र नित्य,
करता है सौ-सौ बार नमन।
मुख्य अतिथि रघुराज सिंह निश्चल ने कहा...
कीर्तित जिनसे यह धरा-धाम।
उन वीरों को शत्-शत् प्रणाम।
विशिष्ट अतिथि के रूप में ओंकार सिंह ओंकार का कहना था...
मिली स्वतंत्रता देश को, दे-देकर बलिदान।
वीरों के बलिदान का, मिलकर रखना मान।।
कार्यक्रम का संचालन करते हुए अशोक विद्रोही ने कहा ...
आज शहीदों का दिन आया,
हम उनका गुणगान करें।
मिटे यहाँ जो बलिवेदी पर,
आओ उन्हें प्रणाम करें।
योगेन्द्र पाल सिंह विश्नोई ने अपने भावों कुछ इस प्रकार व्यक्त किए - जागो-जागो उठो जवानों, राष्ट्र पुकार रहा है।
रामसिंह निशंक के उद्गार थे -
उन वीर सपूतों को अपना, बारम्बार प्रणाम है।
भारत को स्वतंत्र कराया, स्वर्णाक्षरों में नाम है।
डॉ. मनोज रस्तोगी की अभिव्यक्ति थी -
अब हम कुछ बड़ा नहीं मांगते
परमपिता परमेश्वर से
बस यही हैं चाहते
कि हर सुबह वह कह सकें
बेटा ! मैं बिल्कुल ठीक हूॅं।
योगेन्द्र वर्मा व्योम का कहना था -
अमर शहीदों के लिए, सुबह-दोपहर-शाम।
नतमस्तक इस देश का, हर पल उन्हें प्रणाम।।
ऋणी रहेगा उम्रभर, उनका हिन्दुस्तान।
किया जिन्होंने देश पर, प्राणों को बलिदान।।
रचना पाठ करते हुए राजीव प्रखर ने कहा -
माटी तुझे नमन अब, ऊॅंचा है भाल मेरा।
मन में न कोई बाकी कोई सवाल मेरा।
शत्रु का काल बनकर, रण को गया था घर से,
इतिहास में अमर है, मरकर भी लाल मेरा।
कमल शर्मा का कहना था -
रह रह कर है दर्द चमकता अब भी मन की आहों में,
वो भी क्या मंजर था, जो आया था क्रूर निगाहों में।
अंत में मुरादाबाद के दिवंगत साहित्यकार रामदत्त द्विवेदी जी को दो मिनट का मौन रखते हुए श्रद्धांजलि अर्पित की गई। राजीव प्रखर ने आभार-अभिव्यक्त किया।















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