मुरादाबाद की साहित्यिक संस्था हिन्दी साहित्य संगम के तत्वावधान में जितेंद्र कुमार जौली द्वारा प्रकाशित मुरादाबाद साहित्यकार दूरभाष निर्देशिका 'साहित्य सम्पर्क' का लोकार्पण समारोह एवं काव्य गोष्ठी का आयोजन आकांक्षा विद्यापीठ इण्टर कॉलेज, मुरादाबाद में रविवार सात जून 2026 को सम्पन्न हुआ। कार्यक्रम का शुभारंभ माँ शारदे की प्रतिमा के समक्ष दीप प्रज्ज्वलन एवं सरस्वती वन्दना के साथ हुआ। सरस्वती वन्दना राजीव प्रखर द्वारा प्रस्तुत की गई।
कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए वरिष्ठ साहित्यकार ओंकार सिंह ‘ओंकार’ ने कहा-
राम कृष्ण शंकर जी रहते, अपने स्वच्छ विचारों में।
सत्यपथ पर चलना सिखलाते, वे हमको अंधियारों में।।
मुख्य अतिथि के रूप में डॉ महेश दिवाकर ने कहा...
कवि न सुधरे प्यार से दुष्ट आचरण तात।
अपराधी को दीजिए दण्डों की सौगात।।
विशिष्ट अतिथि डॉ. चिरंजीलाल ‘चंचल’ ने सुनाया-
करें कोशिश भले जुगनु, सितारे हो नहीं सकते।
सहारा ढूंढने वाले, सहारे हो नहीं सकते।।
कार्यक्रम का संचालन करते हुए संस्था के महासचिव जितेन्द्र कुमार जौली ने हास्य कविता प्रस्तुत करते हुए सुनाया-
इस कदर बेकरारी छायी कमबख्त।
कल रात हमें नींद न आई कमबख्त।।
हाल क्या थे आपसे क्या बताएं हम,
रात शौचालय में बितायी कमबख्त।।
रामवीर सिंह वीर ने कहा-
उद्वेलित हो श्री कृष्ण प्रश्न मुझसे पूछते इतना बता।
आज मानव खोजता फिरता है क्यों सुख का पता।।
नकुल त्यागी ने कहा-
बड़ों की सीख सेवा से सज संवार यह जाएगी।
स्वार्थ लालच क्रोध से उबलकर वह जाएगी।।
रिश्ते रखो संभाल के जो मिले सौभाग्य से,
जिंदगी है चाय नहीं जो फिर से बन जाएगी।
डॉ मनोज रस्तोगी ने कहा-
महकी आकाश में, चांदनी की गंध।
अधरों की देहरी, लांघ आए छंद।
गंगाजल से छलके, नेह के पिटारे,
उड़ रही रेत , गंगा किनारे ।
योगेन्द्र वर्मा 'व्योम' ने सुनाया-
कथनी तो कुछ और पर, करनी है कुछ और।
इस युग का सिरमौर है, दुहरेपन का दौर।।
चलो करें कुछ कोशिशें, मिलकर ऐसी मित्र।
आने वाला कल बने, उजला और पवित्र।।
राजीव 'प्रखर' ने सुनाया-
क्या तीरथ की कामना, कैसी धन की आस।
बैठी हो जब प्रेम से, अम्मा मेरे पास।।
मन की ऑंखें खोल कर, देख सके तो देख।
कोई है जो रच रहा, कर्मों के अभिलेख।।
प्रशान्त मिश्र ने कहा-
अपनों का आना, सिर्फ हवा का "झोंका है..
चिता पर छोड़ आते समय कितनों ने रोका है।
अशोक कुमार बाबा ने सुनाया-
जो नैनों में दीप जलादे, जो धड़कन दिल की बढ़ा दे।
जो सारी रात जगा दे, वो क्या है मेरे यार,
वो है प्यार -प्यार-प्यार।।
इस अवसर पर रघुराज सिंह निश्चल, अशोक विद्रोही, विवेक निर्मल, मंगू सिंह, योगेंद्र पाल सिंह विश्नोई आदि ने भी अपनी रचनाएं प्रस्तुत की। संस्था के महासचिव जितेंद्र कुमार जौली द्वारा आभार व्यक्त किया गया।











































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