अयोध्या में प्रभु श्रीराम के विग्रह की प्राण प्रतिष्ठा की पूर्व संध्या पर साहित्यिक एवं कला संस्था आदर्श कला संगम की ओर से बुधवार 21 जनवरी 2026 को दिव्य सरस्वती कन्या इण्टर कॉलेज लाइनपार में काव्य-संध्या का आयोजन किया गया। मयंक शर्मा द्वारा प्रस्तुत माता शारदे की वंदना से आरंभ हुए कार्यक्रम की अध्यक्षता डॉ. विश्वास शर्मा ने की। मुख्य अतिथि राजीव कुमार शर्मा एवं विशिष्ट अतिथियों के रूप में रंगकर्मी राजेश रस्तोगी, हरिप्रकाश शर्मा एवं सुनील कुमार शर्मा मंचासीन हुए। संयोजन डॉ. प्रदीप शर्मा एवं संचालन योगेन्द्र वर्मा व्योम ने किया।
ओंकार सिंह ओंकार ने सुनाया-
तुलसी में जैसे बसे, कमल नयन छवि धाम।
अंतस में कभी और के, नहीं बसे श्रीराम।।
डॉ. कृष्ण कुमार नाज़ का कहना था -
सोमवार बाईस जनवरी चौबिस इतना ख़ास।
लौटे राम अयोध्या नगरी ख़त्म हुआ वनवास
कि घर-घर छाया है उल्लास।
अशोक विद्रोही के अनुसार-
अग्नि शिखाऐं सीता माँ को, किंचित जला नहीं पायीं।
राम जल गये निर्मल जल में सरयू बीच गति पायी।
भू से जन्मी सिया, सिया के, भू में प्राण समाये हैं।
डॉ. अर्चना गुप्ता ने राम-रसधार इस प्रकार चलायी-
कितनी पावन कहानी है श्री राम की।
तुलसी ने लिख दी बानी है श्री राम की।
अपहरण माता सीता का जब हो गया,
दिखता आँखों में पानी है श्री राम की।
डॉ. मनोज रस्तोगी ने अपने भावों को शब्द देते हुए कहा-
दाऊ दयाल खन्ना को जब,
त्यागी दिनेश का साथ मिला।
मुरादाबाद की पावन धरती पर ,
तब विचार का एक दीप जला।।
योगेन्द्र वर्मा व्योम ने वातावरण को इन शब्दों से रामरस में डुबोया-
कृपासिंधु के रूप में, छवि धर ललित-ललाम।
दिव्य अयोध्या में हुए, प्राण-प्रतिष्ठित राम।।
जग में श्रद्धा-भाव से, करने जन-कल्याण।
हुआ भव्यतम-दिव्यतम, मन्दिर का निर्माण।।
काव्य-पाठ करते हुए राजीव प्रखर ने कहा-
अवध की गोद में देखो, हुआ फिर आज उजियारा।
मधुर सुर-ताल से सजकर, चली है काव्य की धारा।
विजयश्री सत्य ने पायी, चलो अब साथ ही मिलकर,
सियापति राम का तुम भी, लगा लो आज जयकारा।
मीनाक्षी ठाकुर ने रामधारा को आगे बढ़ाते हुए अपने भावों को इस प्रकार शब्द दिए-
धर्म-ध्वजा लहराई नभ पर, कण-कण मानो राम हुआ।
सदियों का उदबोधन है यह, मंगलमय आयाम हुआ।
मयंक शर्मा की अभिव्यक्ति थी-
कर पूर्ण प्रण वनवास का लौटे प्रभु निज धाम,
महकी अवध की हर दिशा गुंजित हुआ एक नाम,
श्रीराम, श्रीराम, श्रीराम जय जय राम।
दुष्यंत बाबा ने कहा-
राम नाम की महिमा सुनकर जड़ चेतन हो जाते हैं।
लिए थाल में हीरे मोती, जलधि सामने आते हैं।
आवरण अग्रवाल श्रेष्ठ की अभिव्यक्ति थी-
राम अनंत है, राम अपार है
राम प्रारम्भ है, राम विस्तार है,
जिसने जैसा देखा उसने वैसा लिखा,
राम ऐसे अद्भुत उद्गार है।
सुनील शर्मा ने आभार अभिव्यक्त किया।
































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