क्लिक कीजिए
रविवार, 22 फ़रवरी 2026
गुरुवार, 19 फ़रवरी 2026
मुरादाबाद मंडल के जनपद संभल (वर्तमान में मेरठ निवासी) के साहित्यकार सूर्यकांत द्विवेदी का व्यंग्य..... डॉग रोबो
कुत्ते के खून में ईमानदारी लिखी है। बेईमानी तो रत्ती भर नहीं। वह जिसका है,उसका रहेगा। दूसरे का तो वह हो ही नहीं सकता।
बहुत पहले अमेरिका ने रिसर्च की। एक प्रोडक्ट बनाया। उसने उसको पूरी दुनिया में भेज दिया..."देखो...और बताओ...क्या कमी है? क्या और जोड़ सकते हैं।" वह प्रोडक्ट पूरी दुनिया घूमा। चीन, रूस, फ्रांस, कोरिया आदि। सब ने अपने हिसाब से वेल्यू एडिशन किया। पाकिस्तान कुछ कर नहीं सका। उसने जस का तस फॉरवर्ड कर दिया।
अब बारी भारत की थी। सरदारजी ने उसको हर तरफ से घुमा कर देखा। कभी आगे कभी पीछे। कुछ समझ में नहीं आया। उसने मीटिंग बुलाई...ये इंडिया की नाक का सवाल है। कुछ करो। सबने अपनी राय दी। कोई सलाह सरदारजी को नहीं जमी। तभी एक चौधरी आया..."सरदार! सुन। बेवजह की मगज़मारी न कर? अमेरिका हमसे क्या घणा है कै? चौधरी ने प्रोडक्ट हाथ में लिया। उल्टा किया..".इब मिल गया तोड़! लिख..."मेड इन इंडिया"।
तब फैक्ट चेकिंग का विकल्प नहीं था। लतीफा चल गया। प्रोडक्ट अपना हो गया। अमेरिका चिल्लाता रहा..."मेरा है...मेरा है।" लेकिन सबूत भारत के हक़ में थे। हमारे कवि मित्र तो आए दिन रोते हैं। मेरी रचना चोरी हो गई। दूसरे ने पढ़ दी। वह नीचे लिखते भी है स्वरचित। लेकिन कौन सुनता है?
अपने मियां ग़ालिब भी चिल्लाते रहे, यह नज़्म मेरी है। दूसरा इसको क्यों पढ़ रहा है? शायरों ने गालिब को ही बेदखल कर दिया। ग़ालिब मियां भी उस्ताद थे। उन्होंने अपनी गजलों में ऐसे- ऐसे कठिन जुमले डाले कि सामने वाला चित हो गया। कहते हैं, सुमित्रानंदन पंत ने भी यही किया। हमारे गीतकार साथी ने एक गीत लिखा। गलती से वह सोशल मीडिया पर डाल दिया। कवि सम्मेलन में इससे पहले कि उनका नंबर आता, एक दूसरे कवि ने वही गीत पढ़ दिया। उखाड़ लो पूंछ?
हमारे मेरठ में तो "मेड इन.." जो चाहे ले लो। आज तक कोई पकड़ नहीं सका। वो बनाता ही ऐसा है, जो "मेड इन मेरठ" दिखे। कहीं से कुछ भी ले आओ मेरठ के पास उसकी तोड़ है। मेरठ वेस्ट यूपी की राजधानी है। गलगोटिया भी वेस्ट यूपी में है।
गलगोटिया का मामला शर्मनाक है। डॉग रोबो को हमने कहा...हमारा है। चीन कोरिया ने दावा गलत बता दिया। दरअसल डॉग हमारा था, रोबो उनका।
सिंपल सी बात थी। एआई पर जाते...उससे कहते.. "मुझे एक ओरिजिनल सा दिखने वाला डॉग रोबो बना दो, जो 100% हमारा दिखे। " वह बना देता। आजकल सभी यही कर रहे हैं। हर ट्रेड मार्क नकली है।
हो सकता है, गलगोटिया में कुत्ते का दम घुट रहा हो? वह बाहर आ गया.."मुझे भी पहचान दिलाओ।"
डॉग शब्द अभिजात्य है। यह कारों में घूमता है। कुत्ता देशी है। गली में भोंकता है। श्वान साहित्य में बसता है। हो सकता है डॉग ने ही बगावत कर दी हो... मेरा रोबो कैसे?
पहले से फैक्ट चेक कर लेते तो यह नौबत ना आती। इस डॉग ने सर नीचे कर दिया।
✍️ सूर्यकान्त द्विवेदी, मेरठ
मंगलवार, 17 फ़रवरी 2026
अतीत के पन्नों से : मुरादाबाद की साहित्यिक संस्था संकेत की ओर से रविवार, चार मई 2003 को गांधीनगर स्थित गांधीनगर पब्लिक स्कूल में आयोजित अलंकरण समारोह
रविवार, चार मई 2003 स्थान था गांधीनगर स्थित गांधीनगर पब्लिक स्कूल और अवसर था मुरादाबाद की साहित्यिक संस्था संकेत की ओर से आयोजित अलंकरण समारोह का। इस आयोजन में प्रख्यात साहित्यकार माहेश्वर तिवारी को 'सारस्वत सृजन सम्मान' तथा युवा कवि विवेक निर्मल और मूलचन्द राजू को 'संकेत युवा सृजन सम्मान' प्रदान किया गया था। इस अवसर पर सागर तरंग प्रकाशन द्वारा माहेश्वर तिवारी के गीत संग्रह 'सच की कोई शर्त नहीं' का लोकार्पण भी किया गया था।
संकेत के अध्यक्ष अशोक विश्नोई तथा सचिव शिशुपाल सिंह मधुकर के संयुक्त संचालन में आयोजित इस समारोह का शुभारम्भ वीरेन्द्र सिंह बृजवासी द्वारा प्रस्तुत माँ सरस्वती वंदना से हुआ। समारोह की अध्यक्षता करते हुए केजीके महाविद्यालय के सेवानिवृत्त प्राचार्य प्रो महेन्द्र प्रताप ने कहा था माहेश्वर तिवारी का सम्मान उनका ही सम्मान नहीं बल्कि पूरे मुरादाबाद का सम्मान है। उनकी कृति का प्रकाशन करके संकेत ने उन्हें वास्तविक सम्मान प्रदान किया है। इस आयोजन में डॉ रामानन्द शर्मा, डॉ भूपति शर्मा जोशी, और जगदीश शरण अग्रवाल मुख्य अतिथि थे।
इस भव्य समारोह में डॉ मनोज रस्तोगी , अविनाश चन्द्र अविनाश, अनिल कांत बंसल, बलवीर पाठक, ईश्वर चन्द्र गुप्त ईश, एस. एस. शर्मा तुक्कड़ मुरादाबादी, दयाराम वाधवानी निर्दोष, यशपाल सिंह खामोश, लेखराज सिंह राज, रघुराज सिंह निश्चल, रामलाल अनजाना, फक्कड़ मुरादाबादी, शम्भु दयाल गुप्त, रामदत्त द्विवेदी, ओंकार सिंह ओंकार, शिव अवतार सरस, कृष्ण कुमार नाज, डॉ माधुरी सिंह, धीरेन्द्र प्रताप सिंह, रामेश्वर वशिष्ठ, योगेन्द्र वर्मा व्योम, प्रहलाद नारायण मासुर, कृष्ण बिहारी दुबे, बाल सुंदरी तिवारी, डॉ पूनम बंसल, वीरेंद्र कुमार राजपूत, समीर तिवारी, महेश नारायण टंडन चिंतक, आनन्द स्वरूप मिश्रा, राजीव सक्सेना, सतीश फिगार आदि मौजूद रहे।
प्रस्तुत हैं इस आयोजन के कुछ चित्र ....ये सभी चित्र साहित्यिक मुरादाबाद शोधालय को उपलब्ध कराए हैं मुरादाबाद के वरिष्ठ साहित्यकार आदरणीय श्री अशोक विश्नोई जी ने ।
::::प्रस्तुति:::::
डॉ मनोज रस्तोगी
संस्थापक
साहित्यिक मुरादाबाद शोधालय
8,जीलाल स्ट्रीट
मुरादाबाद 244001
उत्तर प्रदेश, भारत
वाट्स एप नम्बर 9456687822
रविवार, 15 फ़रवरी 2026
मुरादाबाद की साहित्यिक संस्था राष्ट्रभाषा हिन्दी प्रचार समिति की ओर से 14 फरवरी 2026 को काव्य-गोष्ठी का आयोजन
मुरादाबाद की साहित्यिक संस्था राष्ट्रभाषा हिन्दी प्रचार समिति की ओर से रविवार 14 फरवरी 2026 को देश के बलिदानियों को समर्पित काव्य-गोष्ठी का आयोजन किया गया।
रामसिंह निशंक द्वारा प्रस्तुत माता सरस्वती की वंदना से आरंभ हुए कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए डॉ. महेश 'दिवाकर' ने कहा ...
आज़ादी की बलिवेदी पर, चढ़ने वालों नमन !
नमन! सौ बार नमन! कृतज्ञ अमित है राष्ट्र नित्य,
करता है सौ-सौ बार नमन।
मुख्य अतिथि रघुराज सिंह निश्चल ने कहा...
कीर्तित जिनसे यह धरा-धाम।
उन वीरों को शत्-शत् प्रणाम।
विशिष्ट अतिथि के रूप में ओंकार सिंह ओंकार का कहना था...
मिली स्वतंत्रता देश को, दे-देकर बलिदान।
वीरों के बलिदान का, मिलकर रखना मान।।
कार्यक्रम का संचालन करते हुए अशोक विद्रोही ने कहा ...
आज शहीदों का दिन आया,
हम उनका गुणगान करें।
मिटे यहाँ जो बलिवेदी पर,
आओ उन्हें प्रणाम करें।
योगेन्द्र पाल सिंह विश्नोई ने अपने भावों कुछ इस प्रकार व्यक्त किए - जागो-जागो उठो जवानों, राष्ट्र पुकार रहा है।
रामसिंह निशंक के उद्गार थे -
उन वीर सपूतों को अपना, बारम्बार प्रणाम है।
भारत को स्वतंत्र कराया, स्वर्णाक्षरों में नाम है।
डॉ. मनोज रस्तोगी की अभिव्यक्ति थी -
अब हम कुछ बड़ा नहीं मांगते
परमपिता परमेश्वर से
बस यही हैं चाहते
कि हर सुबह वह कह सकें
बेटा ! मैं बिल्कुल ठीक हूॅं।
योगेन्द्र वर्मा व्योम का कहना था -
अमर शहीदों के लिए, सुबह-दोपहर-शाम।
नतमस्तक इस देश का, हर पल उन्हें प्रणाम।।
ऋणी रहेगा उम्रभर, उनका हिन्दुस्तान।
किया जिन्होंने देश पर, प्राणों को बलिदान।।
रचना पाठ करते हुए राजीव प्रखर ने कहा -
माटी तुझे नमन अब, ऊॅंचा है भाल मेरा।
मन में न कोई बाकी कोई सवाल मेरा।
शत्रु का काल बनकर, रण को गया था घर से,
इतिहास में अमर है, मरकर भी लाल मेरा।
कमल शर्मा का कहना था -
रह रह कर है दर्द चमकता अब भी मन की आहों में,
वो भी क्या मंजर था, जो आया था क्रूर निगाहों में।
अंत में मुरादाबाद के दिवंगत साहित्यकार रामदत्त द्विवेदी जी को दो मिनट का मौन रखते हुए श्रद्धांजलि अर्पित की गई। राजीव प्रखर ने आभार-अभिव्यक्त किया।
शनिवार, 14 फ़रवरी 2026
मुरादाबाद के साहित्यकार डॉ पुनीत कुमार की कविता ..वेलेंटाइन डे
एक गधी ने
अपने गधे से कहा
हमारी शादी को
दस साल से ज्यादा हो गए
आप कभी मेरे लिए
गोभी तक का
फूल नहीं लाए हो
मुझको तो डाउट है
तुम किसी दूसरी गधी से
दिल लगाए हो
इस बार हम भी
कुछ नया कर के दिखाएंगे
रोज डे,प्रपोज डे
हग डे,चॉकलेट डे
किस डे,वेलेंटाइन डे
सबके सब मनाएंगे
गधा बोला
एक तो हम हिंदुस्तानी हैं
दूसरे इंसान नहीं गधे हैं
इसलिए संस्कृति
और परंपराओं से बंधे हैं
विदेशियों का
आंख बंद कर
अनुसरण नहीं करते
केवल प्यार करते है
प्यार का
प्रदर्शन नहीं करते
हम नहीं करेंगे
कोई भी ऐसा काम
जिससे हमारे पूर्वजों का
नाम हो बदनाम
गधी झुंझला कर बोली
तुम नहीं सुधरोगे
तुम गधे थे
गधे हो
और गधे ही रहोगे।
✍️डॉ पुनीत कुमार
मुरादाबाद 244001




































