गुरुवार, 22 जनवरी 2026

मुरादाबाद की संस्था आदर्श कला संगम की ओर से श्रीराम-विग्रह की प्राण प्रतिष्ठा की पूर्व संध्या पर 21 जनवरी 2026 को काव्य-संध्या का आयोजन

 अयोध्या में प्रभु श्रीराम के विग्रह की प्राण प्रतिष्ठा की पूर्व संध्या पर साहित्यिक एवं कला संस्था आदर्श कला संगम की ओर से बुधवार 21 जनवरी 2026 को दिव्य सरस्वती कन्या इण्टर कॉलेज लाइनपार में काव्य-संध्या का आयोजन किया गया। मयंक शर्मा द्वारा प्रस्तुत माता शारदे की वंदना से आरंभ हुए कार्यक्रम की अध्यक्षता डॉ. विश्वास शर्मा ने की। मुख्य अतिथि राजीव कुमार शर्मा एवं विशिष्ट अतिथियों के रूप में  रंगकर्मी राजेश रस्तोगी, हरिप्रकाश शर्मा एवं सुनील कुमार शर्मा मंचासीन हुए। संयोजन डॉ. प्रदीप शर्मा एवं संचालन योगेन्द्र वर्मा व्योम ने किया। 

 ओंकार सिंह ओंकार ने सुनाया- 

तुलसी में जैसे बसे, कमल नयन छवि धाम।

 अंतस में कभी और के, नहीं बसे श्रीराम।। 

डॉ. कृष्ण कुमार नाज़ का कहना था - 

सोमवार बाईस जनवरी चौबिस इतना ख़ास। 

लौटे राम अयोध्या नगरी ख़त्म हुआ वनवास 

कि घर-घर छाया है उल्लास।

 अशोक विद्रोही के अनुसार- 

अग्नि शिखाऐं सीता माँ को, किंचित जला नहीं पायीं। 

राम जल गये निर्मल जल में सरयू बीच गति पायी। 

भू से जन्मी सिया, सिया के, भू में प्राण समाये हैं।

  डॉ. अर्चना गुप्ता ने राम-रसधार इस प्रकार चलायी-

 कितनी पावन कहानी है श्री राम की।

 तुलसी ने लिख दी बानी है श्री राम की। 

अपहरण माता सीता का जब हो गया, 

दिखता आँखों में पानी है श्री राम की।

 डॉ. मनोज रस्तोगी ने अपने भावों को शब्द देते हुए कहा-

 दाऊ दयाल खन्ना को जब,

 त्यागी दिनेश का साथ मिला। 

मुरादाबाद की पावन धरती पर , 

तब विचार का एक दीप जला।। 

 योगेन्द्र वर्मा व्योम ने वातावरण को इन शब्दों से रामरस में डुबोया- 

कृपासिंधु के रूप में, छवि धर ललित-ललाम। 

दिव्य अयोध्या में हुए, प्राण-प्रतिष्ठित राम।। 

जग में श्रद्धा-भाव से, करने जन-कल्याण। 

हुआ भव्यतम-दिव्यतम, मन्दिर का निर्माण।। 

काव्य-पाठ करते हुए राजीव प्रखर ने कहा-

अवध की गोद में देखो, हुआ फिर आज उजियारा। 

मधुर सुर-ताल से सजकर, चली है काव्य की धारा।  

विजयश्री सत्य ने पायी, चलो अब साथ ही मिलकर, 

सियापति राम का तुम भी, लगा लो आज जयकारा। 

  मीनाक्षी ठाकुर ने रामधारा को आगे बढ़ाते हुए अपने भावों को इस प्रकार शब्द दिए- 

धर्म-ध्वजा लहराई नभ पर, कण-कण मानो राम हुआ। 

सदियों का उदबोधन है यह, मंगलमय आयाम हुआ। 

 मयंक शर्मा की अभिव्यक्ति थी- 

कर पूर्ण प्रण वनवास का लौटे प्रभु निज धाम, 

महकी अवध की हर दिशा गुंजित हुआ एक नाम, 

श्रीराम, श्रीराम, श्रीराम जय जय राम। 

दुष्यंत बाबा ने कहा- 

राम नाम की महिमा सुनकर जड़ चेतन हो जाते हैं। 

लिए थाल में हीरे मोती, जलधि सामने आते हैं। 

 आवरण अग्रवाल श्रेष्ठ की अभिव्यक्ति थी-

 राम अनंत है, राम अपार है 

राम प्रारम्भ है, राम विस्तार है, 

जिसने जैसा देखा उसने वैसा लिखा, 

राम ऐसे अद्भुत उद्गार है। 

सुनील शर्मा ने आभार अभिव्यक्त किया। 



































सोमवार, 19 जनवरी 2026

मुरादाबाद के साहित्यकार रामदत्त द्विवेदी का देहावसान






मुरादाबाद के वयोवृद्ध साहित्यकार एवं साहित्यिक संस्था हिन्दी साहित्य संगम के अध्यक्ष रामदत्त द्विवेदी का रविवार 18 जनवरी 2026 की सुबह देहावसान हो गया। वह 90 वर्ष के थे और पिछले कुछ समय से अस्वस्थ थे। अपने पीछे वह दो पुत्रों और एक पुत्री का भरा पूरा परिवार रोता बिलखता छोड़ गए। उनका अंतिम संस्कार लोकोशेड स्थित मोक्ष धाम में किया गया।

     साहित्यिक मुरादाबाद के संस्थापक अध्यक्ष डॉ मनोज रस्तोगी ने बताया कि 30 जून 1937 को रामपुर की तहसील शाहबाद में पंडित गोपाल दत्त द्विवेदी एवं कैलाशो देवी के सुपुत्र के रूप में जन्में रामदत्त द्विवेदी आजीवन हिन्दी साहित्य के प्रति समर्पित भाव से सक्रिय रहे। उनकी दो काव्य-कृतियां 'हम अंधेरों को मिटायें' और 'खुद को बदलना होगा' प्रकाशित हो चुकी हैं। उन्हें साहित्यिक मुरादाबाद की ओर से  राजेन्द्र मोहन शर्मा श्रृंग' स्मृति सम्मान, आदर्श कला संगम द्वारा माहेश्वर तिवारी सम्मान, कला भारती द्वारा कला श्री तथा सरस्वती परिवार द्वारा काव्य भूषण सम्मान से सम्मानित किया जा चुका है।

     उनकी अंतिम यात्रा रविवार को उनके मिलन विहार स्थित आवास से प्रारम्भ हुई। लोकोशेड स्थित मोक्षधाम में उनके पार्थिव शरीर को उनके सुपुत्र प्रतीत कुमार शर्मा  ने मुखाग्नि दी। महानगर के साहित्यकारों ओंकार सिंह, रघुराज सिंह निश्छल, डॉ महेश दिवाकर, अशोक विद्रोही,  वीरेंद्र सिंह बृजवासी, राम सिंह निशंक, राजीव प्रखर, दुष्यन्त बाबा, जितेंद्र सिंह जौली, मनोज व्यास,  मयंक शर्मा, अनुराग मेहता, मनोज मनु, अमर सक्सेना, नकुल त्यागी, डॉ कृष्ण कुमार नाज, उदय अस्त, समीर तिवारी, संजीव आकांक्षी समेत अनेक गणमान्य नागरिकों ने उन्हें अश्रुपूरित नेत्रों से अंतिम विदाई दी। 

    महानगर की साहित्यिक संस्थाओं मुरादाबाद लिटरेरी क्लब, साहित्यपीडिया, राष्ट्रभाषा हिन्दी प्रचार समिति, हस्ताक्षर, अंतरा, हरसिंगार, कला भारती, उर्दू सहित्य शोध केंद्र, विजयश्री वेलफेयर सोसाइटी, अल्फाज अपने, साहित्यिक मुरादाबाद, हिन्दी साहित्य संगम, संस्कार भारती, जैमिनी साहित्य फाउंडेशन, अखिल भारतीय साहित्य कला मंच, काव्य धारा, गुंजन प्रकाशन आदि ने उनके देहावसान पर शोक व्यक्त किया है । 











शनिवार, 20 दिसंबर 2025

मुरादाबाद के साहित्यकार स्मृतिशेष आनंद कुमार गौरव के दो गीत ...। ये प्रकाशित हुए हैं युगांशु मालवीय के संपादन में भोपाल से प्रकाशित मासिक पत्रिका शिवम् पूर्णा के अप्रैल - मई 2015 (वर्ष 6, अंक 2-3)अंक में पेज 35 पर ...

 




मुरादाबाद मंडल के जनपद बिजनौर निवासी साहित्यकार डॉ अजय जनमेजय के दो गीत ...। ये प्रकाशित हुए हैं युगांशु मालवीय के संपादन में भोपाल से प्रकाशित मासिक पत्रिका शिवम् पूर्णा के जून 2015 (वर्ष 6, अंक 4)अंक में पेज 18 पर ...