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रविवार, 26 अप्रैल 2026
रविवार, 19 अप्रैल 2026
रविवार, 12 अप्रैल 2026
सोमवार, 6 अप्रैल 2026
मुरादाबाद की साहित्यिक संस्था हिन्दी साहित्य संगम के तत्वावधान में पांच अप्रैल 2026 को काव्यगोष्ठी का आयोजन
मुरादाबाद की साहित्यिक संस्था हिन्दी साहित्य संगम के तत्वावधान में रविवार पांच अप्रैल 2026 को आकांक्षा विद्यापीठ इण्टर कॉलेज, मुरादाबाद में काव्यगोष्ठी का आयोजन किया गया।
रवि चतुर्वेदी द्वारा प्रस्तुत सरस्वती वंदना से आरम्भ कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए वरिष्ठ साहित्यकार ओंकार सिंह ‘ओंकार’ ने अपनी रचना में लोकजीवन का चित्रण प्रस्तुत किया...
“एक सपेरा अपनी धुन में रहता है तल्लीन,
वह नागों को नित्य पकड़ता, बजा-बजाकर बीन।”
मुख्य अतिथि के रूप में डॉ. महेश दिवाकर ने वीर रस की रचना सुनाते हुए कहा—
“उठो! कमर कसकर उठो, लो हाथों में तलवार,
चूको मत, मारो सखे! मिलें जहाँ गद्दार।”
विशिष्ट अतिथि के रूप में डॉ. मनोज रस्तोगी ने युद्ध की विभीषिका का मार्मिक चित्रण करते हुए कहा—
“उड़ रही गंध ताजे खून की,
बरसा रहा ज़हर मानसून भी,
घुटता है दम
अब विस्फोटों के बीच।”
कार्यक्रम का संचालन करते हुए संस्था के महासचिव जितेन्द्र कुमार जौली ने हास्य-व्यंग्य के माध्यम से वर्तमान युवा पीढ़ी की स्थिति पर कटाक्ष करते हुए कहा—
“क्या हो गया है नौजवानों को,
सबके दिमाग सड़ रहे हैं,
फिल्मों का ही असर है शायद,
ये कुत्ते भी बिगड़ रहे हैं।”
नकुल त्यागी ने आत्ममंथन पर आधारित पंक्तियाँ प्रस्तुत कीं—
“अगर मैं अपने आप से प्यार कर लेता,
एक झटके में ही दरिया पार कर लेता।”
डॉ. कृष्णकुमार ‘नाज़’ ने समाज की संवेदनहीनता को उजागर करते हुए कहा—
“दीन-हीनता निर्धनता का हाथ चूमकर समझाती है,
नन्हीं दूब हमेशा सबके पैरों से रौंदी जाती है।”
योगेन्द्र वर्मा ‘व्योम’ ने युद्ध और मानवता पर गहन विचार व्यक्त करते हुए कहा—
“मानवता की देह ही होती लहूलुहान,
‘युद्ध’ समस्या का कभी होते नहीं निदान।”
रवि चतुर्वेदी ने वीर रस से ओतप्रोत देशभक्ति की रचना प्रस्तुत कर श्रोताओं में उत्साह भर दिया—
“कर्ज ये मातृभूमि का कदापि चुक नहीं सकता,
तिरंगा देश का अपना कभी भी झुक नहीं सकता।”
कमल कुमार शर्मा ने जीवन को शतरंज की बिसात से जोड़ते हुए कहा—
“दोस्तों और दुश्मनों की चालों के शतरंज में,
बादशाह की जिद के आगे मात खाती ज़िंदगी।”
प्रशांत मिश्र ने मानवीय संवेदनाओं पर आधारित पंक्तियाँ प्रस्तुत कीं—
“भूखे हो अहम् के, तो अपनों से रोटियाँ छीन लो,
छिनी रोटी हाथ से जीवन गुजर जाए, ये ज़रूरी तो नहीं।”
महासचिव जितेन्द्र कुमार जौली ने आभार व्यक्त किया।
रविवार, 5 अप्रैल 2026
रविवार, 22 मार्च 2026
मंगलवार, 10 मार्च 2026
मुरादाबाद के साहित्यकार वीरेंद्र सिंह बृजवासी का गीत....यदि परमाणु युद्ध हुआ तो!
यदि परमाणु युद्ध हुआ तो,
न तुम बचोगे, न हम बचेंगे,
धुआँ - धुआँ सब हो जाएगा,
न तुम हंसोगे, न हम हंसेंगे!
बड़ी भयानक प्रलय मचेगी,
बदल जाएगी चाल ग्रहों की,
अग्नि पिण्ड के चक्रव्यूह में,
धरती औ आकाश जलेंगे!
कंकालों से धरा पटेगी,
पेड़-रुख जल भुन जाएंगे,
पर्वत शिखर धराशाई हो,
भूकंपों की कथा कहेंगे!
भीषण गर्मी से नदियों की,
जल धारा ढूंढे न मिलेगी,
खेत, बाग, वन बंजर होकर,
जीवन का अस्तित्व हरेंगे!
केवल अपनी स्वार्थ सिद्धि में,
सर्व हितों से मुख मत मोड़ो,
धरती सबके लिए बनी है,
कब तक यों बेमौत मरेंगे!
परमपिता सब देख रहे हैं,
मानव कीघृणित गतिविधियाँ
निश्चित होगा भष्म घमंडी,
जब भी ईश्वर न्याय करेंगे!
उसके आगे कभी किसी की,
दादागीरी नहीं चलेगी,
जो कोई भगवान बनेगा,
दुर्दिन उसके साथ चलेंगे!
महाप्रलय की बात न सोचो,
केवल मानवता अपना लो,
सबको गले लगाने वाले,
सदियों - सदियों याद रहेंगे!
✍️वीरेन्द्र सिंह "ब्रजवासी"
मुरादाबाद 244001
उत्तर प्रदेश, भारत
मोबाइल फोन नम्बर 9719275453
रविवार, 8 मार्च 2026
बुधवार, 4 मार्च 2026
मुरादाबाद के साहित्यकार योगेन्द्र वर्मा व्योम का नवगीत... फागुन का आलाप
गुझिया इठलाकर बल खाकर
पिचकारी से बोली
चल आजा
हम खेलें होली
गूँज रहा मस्ती की धुन पर
फागुन का आलाप
लेकिन तू कोने में छिपकर
बैठी है चुपचाप
बुला रही है उम्मीदों की
रंग-बिरंगी टोली
धीरज रख फिर से आएगा
वही पुराना दौर
फूटेगा जब आमों पर फिर
निश्छलता का बौर
यहाँ-वहाँ सब ओर करेगा
टेसू हँसी-ठिठोली
तुझमें रंग भरे जीवन के
मुझमें भरी मिठास
चल मिलकर वापस लाते हैं
रिश्तों में उल्लास
अपनेपन के गाढ़े रँग से
रचें नई रंगोली
✍️योगेन्द्र वर्मा 'व्योम'
मुरादाबाद 244001
उत्तर प्रदेश, भारत
मंगलवार, 3 मार्च 2026
रविवार, 1 मार्च 2026
रविवार, 22 फ़रवरी 2026
गुरुवार, 19 फ़रवरी 2026
मुरादाबाद मंडल के जनपद संभल (वर्तमान में मेरठ निवासी) के साहित्यकार सूर्यकांत द्विवेदी का व्यंग्य..... डॉग रोबो
कुत्ते के खून में ईमानदारी लिखी है। बेईमानी तो रत्ती भर नहीं। वह जिसका है,उसका रहेगा। दूसरे का तो वह हो ही नहीं सकता।
बहुत पहले अमेरिका ने रिसर्च की। एक प्रोडक्ट बनाया। उसने उसको पूरी दुनिया में भेज दिया..."देखो...और बताओ...क्या कमी है? क्या और जोड़ सकते हैं।" वह प्रोडक्ट पूरी दुनिया घूमा। चीन, रूस, फ्रांस, कोरिया आदि। सब ने अपने हिसाब से वेल्यू एडिशन किया। पाकिस्तान कुछ कर नहीं सका। उसने जस का तस फॉरवर्ड कर दिया।
अब बारी भारत की थी। सरदारजी ने उसको हर तरफ से घुमा कर देखा। कभी आगे कभी पीछे। कुछ समझ में नहीं आया। उसने मीटिंग बुलाई...ये इंडिया की नाक का सवाल है। कुछ करो। सबने अपनी राय दी। कोई सलाह सरदारजी को नहीं जमी। तभी एक चौधरी आया..."सरदार! सुन। बेवजह की मगज़मारी न कर? अमेरिका हमसे क्या घणा है कै? चौधरी ने प्रोडक्ट हाथ में लिया। उल्टा किया..".इब मिल गया तोड़! लिख..."मेड इन इंडिया"।
तब फैक्ट चेकिंग का विकल्प नहीं था। लतीफा चल गया। प्रोडक्ट अपना हो गया। अमेरिका चिल्लाता रहा..."मेरा है...मेरा है।" लेकिन सबूत भारत के हक़ में थे। हमारे कवि मित्र तो आए दिन रोते हैं। मेरी रचना चोरी हो गई। दूसरे ने पढ़ दी। वह नीचे लिखते भी है स्वरचित। लेकिन कौन सुनता है?
अपने मियां ग़ालिब भी चिल्लाते रहे, यह नज़्म मेरी है। दूसरा इसको क्यों पढ़ रहा है? शायरों ने गालिब को ही बेदखल कर दिया। ग़ालिब मियां भी उस्ताद थे। उन्होंने अपनी गजलों में ऐसे- ऐसे कठिन जुमले डाले कि सामने वाला चित हो गया। कहते हैं, सुमित्रानंदन पंत ने भी यही किया। हमारे गीतकार साथी ने एक गीत लिखा। गलती से वह सोशल मीडिया पर डाल दिया। कवि सम्मेलन में इससे पहले कि उनका नंबर आता, एक दूसरे कवि ने वही गीत पढ़ दिया। उखाड़ लो पूंछ?
हमारे मेरठ में तो "मेड इन.." जो चाहे ले लो। आज तक कोई पकड़ नहीं सका। वो बनाता ही ऐसा है, जो "मेड इन मेरठ" दिखे। कहीं से कुछ भी ले आओ मेरठ के पास उसकी तोड़ है। मेरठ वेस्ट यूपी की राजधानी है। गलगोटिया भी वेस्ट यूपी में है।
गलगोटिया का मामला शर्मनाक है। डॉग रोबो को हमने कहा...हमारा है। चीन कोरिया ने दावा गलत बता दिया। दरअसल डॉग हमारा था, रोबो उनका।
सिंपल सी बात थी। एआई पर जाते...उससे कहते.. "मुझे एक ओरिजिनल सा दिखने वाला डॉग रोबो बना दो, जो 100% हमारा दिखे। " वह बना देता। आजकल सभी यही कर रहे हैं। हर ट्रेड मार्क नकली है।
हो सकता है, गलगोटिया में कुत्ते का दम घुट रहा हो? वह बाहर आ गया.."मुझे भी पहचान दिलाओ।"
डॉग शब्द अभिजात्य है। यह कारों में घूमता है। कुत्ता देशी है। गली में भोंकता है। श्वान साहित्य में बसता है। हो सकता है डॉग ने ही बगावत कर दी हो... मेरा रोबो कैसे?
पहले से फैक्ट चेक कर लेते तो यह नौबत ना आती। इस डॉग ने सर नीचे कर दिया।
✍️ सूर्यकान्त द्विवेदी, मेरठ
मंगलवार, 17 फ़रवरी 2026
अतीत के पन्नों से : मुरादाबाद की साहित्यिक संस्था संकेत की ओर से रविवार, चार मई 2003 को गांधीनगर स्थित गांधीनगर पब्लिक स्कूल में आयोजित अलंकरण समारोह
रविवार, चार मई 2003 स्थान था गांधीनगर स्थित गांधीनगर पब्लिक स्कूल और अवसर था मुरादाबाद की साहित्यिक संस्था संकेत की ओर से आयोजित अलंकरण समारोह का। इस आयोजन में प्रख्यात साहित्यकार माहेश्वर तिवारी को 'सारस्वत सृजन सम्मान' तथा युवा कवि विवेक निर्मल और मूलचन्द राजू को 'संकेत युवा सृजन सम्मान' प्रदान किया गया था। इस अवसर पर सागर तरंग प्रकाशन द्वारा माहेश्वर तिवारी के गीत संग्रह 'सच की कोई शर्त नहीं' का लोकार्पण भी किया गया था।
संकेत के अध्यक्ष अशोक विश्नोई तथा सचिव शिशुपाल सिंह मधुकर के संयुक्त संचालन में आयोजित इस समारोह का शुभारम्भ वीरेन्द्र सिंह बृजवासी द्वारा प्रस्तुत माँ सरस्वती वंदना से हुआ। समारोह की अध्यक्षता करते हुए केजीके महाविद्यालय के सेवानिवृत्त प्राचार्य प्रो महेन्द्र प्रताप ने कहा था माहेश्वर तिवारी का सम्मान उनका ही सम्मान नहीं बल्कि पूरे मुरादाबाद का सम्मान है। उनकी कृति का प्रकाशन करके संकेत ने उन्हें वास्तविक सम्मान प्रदान किया है। इस आयोजन में डॉ रामानन्द शर्मा, डॉ भूपति शर्मा जोशी, और जगदीश शरण अग्रवाल मुख्य अतिथि थे।
इस भव्य समारोह में डॉ मनोज रस्तोगी , अविनाश चन्द्र अविनाश, अनिल कांत बंसल, बलवीर पाठक, ईश्वर चन्द्र गुप्त ईश, एस. एस. शर्मा तुक्कड़ मुरादाबादी, दयाराम वाधवानी निर्दोष, यशपाल सिंह खामोश, लेखराज सिंह राज, रघुराज सिंह निश्चल, रामलाल अनजाना, फक्कड़ मुरादाबादी, शम्भु दयाल गुप्त, रामदत्त द्विवेदी, ओंकार सिंह ओंकार, शिव अवतार सरस, कृष्ण कुमार नाज, डॉ माधुरी सिंह, धीरेन्द्र प्रताप सिंह, रामेश्वर वशिष्ठ, योगेन्द्र वर्मा व्योम, प्रहलाद नारायण मासुर, कृष्ण बिहारी दुबे, बाल सुंदरी तिवारी, डॉ पूनम बंसल, वीरेंद्र कुमार राजपूत, समीर तिवारी, महेश नारायण टंडन चिंतक, आनन्द स्वरूप मिश्रा, राजीव सक्सेना, सतीश फिगार आदि मौजूद रहे।
प्रस्तुत हैं इस आयोजन के कुछ चित्र ....ये सभी चित्र साहित्यिक मुरादाबाद शोधालय को उपलब्ध कराए हैं मुरादाबाद के वरिष्ठ साहित्यकार आदरणीय श्री अशोक विश्नोई जी ने ।
::::प्रस्तुति:::::
डॉ मनोज रस्तोगी
संस्थापक
साहित्यिक मुरादाबाद शोधालय
8,जीलाल स्ट्रीट
मुरादाबाद 244001
उत्तर प्रदेश, भारत
वाट्स एप नम्बर 9456687822



















































