मुरादाबाद की संस्था रैड सोसायटी की ओर से स्वतंत्रता दिवस की पूर्व संध्या पर शनिवार 14 अगस्त 2021को सेनानी भवन कम्पनी बाग में कवि सम्मेलन का आयोजन किया गया।
वरिष्ठ साहित्यकार डॉ मनोज रस्तोगी ने काव्यपाठ करते हुए कहा----
सुन रहे यह साल आदमखोर है ,
हर तरफ चीख दहशत शोर है,
मत कहो यह वायरस जहरीला बहुत,
आदमी ही आजकल कमजोर है
चर्चित कवि विवेक निर्मल का स्वर था--
देशभक्ति का भाव मिटाया राजनीति का खेल था,
जिसने भारत एक बनाया उसका नाम पटेल था
युवा गीतकार मयंक शर्मा ने मुक्तक प्रस्तुत करते हुए कहा---
उन्नत मां का भाल करे जो उनका वंदन होता है
बलिदानी संतानों का जग में अभिनंदन होता है
माटी में मिल कर खुशबू जो नीलगगन तक छोड़ गए
ऐसे वीरों की धरती का कण कण चंदन होता है
आवरण अग्रवाल " श्रेष्ठ " ने कहा---
हम वो हैं जो अपने रकीबों से भी प्यार करते हैं।
अपने वतन के लिए अपनी जान निसार करते हैं ।
यूं तो महबूब की मोहब्बत में सब कुछ फना कर सकते हैं ।
पर जब बात वतन की हो तो उसको भी मना कर सकते हैं।
आर्यन प्रताप ने कहा -----
हमें गर्व है हम उस भारत मां के ऐसे बेटे हैं,
जान गंवा कर भी भारत का मान नहीं घटने देंगें,
बन जाएंगे भगत सिंह और बिस्मिल हम बन जाएंगे,
अपने वीर सपूतों का सम्मान नहीं घटने देंगे।
शिवम वर्मा का कहना था ----
न हो नफरत कोई नहीं दंगा रहे,
बस दिलों में अमन की ही गंगा बहे,
बात वीरों की हो या अमीरों की हो,
सबसे ऊपर ये मेरा तिरंगा रहे,
राशिद मुरादाबादी ने कहा ----
ना पूछो जमाने वालों की क्या हमारी कहानी है,
हमारी तो पहचान यह है कि हम हिंदुस्तानी हैं
ईशांत शर्मा "ईशु" का कहना था----
अब तिरंगे का अपमान सहा नहीं जाता,
देख कर दुराचार चुपचाप रहा नहीं जाता,
लाल रंग शौर्य का तुम को दफन करेगा,
श्वेत रंग शांति का तुम्हारा कफन बनेगा,
मुख्य अतिथि के रूप में सम्बोधित करते हुए मण्डलायुक्त आन्जनेय कुमार सिंह ने मुरादाबाद की साहित्यिक एवं सांस्कृतिक विरासत, इतिहास और परंपरा के संरक्षण की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने कहा कि आज जरूरत है कि हम स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों के संपूर्ण जीवन परिचय से युवा पीढ़ी को अवगत कराएं और उनके भीतर पुस्तकें पढ़ने की रुचि जाग्रत करें।उन्होंने कहा कि टाउन हाल पर एक वृहद पुस्तकालय की योजना को प्रशासन द्वारा साकार रूप दिया जा रहा है।इसमें नेत्रहीन भी पढ़ सकेंगे। उन्होंने कहा कि देश के कई क्रान्तिकारी अलग-अलग विचारधारा के थे, लेकिन उन सभी का एक ही लक्ष्य था आजादी। आजादी के लिए हमने अपने पूर्वजों को खोया । उन्होंने कहा कि जो लोग गुमनामी का शिकार हुए, उनका भी इतिहास संकलित किया जाना चाहिये। उन्होंने कहा कि अशफाक उल्ला खां पक्के और सच्चे मुसलमान, सरदार भगत सिंह पक्के सिख और चन्द्रशेखर आज़ाद पक्के ब्राहमण (हिन्दू) थे, लेकिन इन सभी का एकमात्र उद्देश्य आजादी ही था।
उप श्रमायुक्त पीके सिंह, मेजर राजीव ढल , डॉ प्रदीप शर्मा, सरदार गुरविंदर सिंह, देवेन्द्र सिंह सिसौदिया,विश्वबन्धु विश्नोई ने विचार व्यक्त किये।इस अवसर पर सेनानी उत्तराधिकारी संगठन द्वारा सेनानियों की परिचय पुस्तिका "नमन" ,एहसास सेवा समिति की ओर से शमादान, परशुराम सेवा समिति ने "व्रत-उत्सव पत्रिका" भेंट कर मंडलायुक्त का अभिनंदन किया गया।
कार्यक्रम में सुशील कुमार शर्मा, परवेज नाजिम, अनिमेष शर्मा, संजय स्वामी, आशीष त्रिवेदी, आर.एन.कत्याल, जुनैदउद्दीन, जितेन्द्र कुमार गुप्ता, बल्देव राज अरोड़ा, मोइनुद्दीन, कशिश चौहान, कपिल परिवर्तन द चेंज, गोपाल हरि, कुशलपाल सिंह, पवन वशिष्ठ, अभिनव दीक्षित, दक्षिता पाठक, यश दिवाकर, मोहित शर्मा आदि उपस्थित रहे। संचालन समिति के महामंत्री एवं अखिल भारतीय स्वतंत्रता सेनानी उत्तराधिकारी संगठन के महामंत्री धवल दीक्षित ने किया तथा अध्यक्षता संगठन के अध्यक्ष इशरत उल्ला खाँ ने की।
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धवल दीक्षित, मुरादाबाद, उत्तर प्रदेश, भारत