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मंगलवार, 10 जनवरी 2023

मुरादाबाद के साहित्यकार नकुल त्यागी की रचना ...हिंदी भारत की भाषा है

 

 हिंदी भारत की भाषा है, 

यह जान गई सारी दुनिया ।

बस भारत से ही आशा है,

यह मान गई सारी दुनिया । 

सब जग के कोने कोने में,

 बैठे जो भारतवंशी हैं ,

उनके हिम्मत कौशल को,

पहचान गई सारी दुनिया ।

जो हिंदी लिखते कहते हैं,

 इंसान बो अच्छे होते हैं,

दे सम्मान रही दुनिया ।

मानव हो मानवता हो, 

संस्कृति हो या सभ्यता हो, 

वैश्विक भाषा होगी हिंदी,

हैरान हुई सारी दुनिया ।


✍️ नकुल त्यागी 

10/58 बुद्धि विहार

 मुरादाबाद 244001

उत्तर प्रदेश, भारत

रविवार, 8 मई 2022

मुरादाबाद के साहित्यकार नकुल त्यागी की रचना ---मां हृदय में तेरी तस्वीर बसी....

 


मां हृदय में तेरी तस्वीर बसी,

तुम मन मस्तक में समाई हो!

 जीवन में जब जब धूप पड़ी,

 तुम छाता बनकर छाई हो !

विद्वान कवि सब मान रहे,

मां तो ईश्वर ही होती है !

मां किसे तुम्हारी उपमा दूं ,

मां तो बस मां ही होती है!

प्यार कसक और टीस लिए, 

फिर भी खुश ही दिखती है!

तिरस्कार मिले,फिर भी दे दुआएं,

 ऐसी मां ही होती है !

श्रद्धा है , पर अद्धा है, 

और पति का मान बढ़ाती है!

मां को जो भी स्वरूप मिला,

उन सब में पूजी जाती है !

प्रथम गुरु मां ही होती ,

 जग से परिचय करवाती है!

 जगजननी जीजाबाई बनकर,

 बच्चे को शिवा बनाती है !

धीर  वीर गंभीर कोई हो ,

हो निष्कामभाव या भोगी हो!

प्रभु से पहले मां का दर्जा, 

चाहे मोदी हो या योगी हो!

 

✍️ नकुल त्यागी

 मुरादाबाद

उत्तर प्रदेश, भारत