बुधवार, 19 फ़रवरी 2020

मुरादाबाद के साहित्यकार पंकज दर्पण अग्रवाल की लघुकथा

**भूल
आज वो आफिस से लौटने में लेट हो गयी थी । अंधेरा होने लगा था- सड़क सुनसान थी।
वो सहमी सहमी तेज़ कदमो से अपने घर के लिये कदम बढ़ाने लगी। तभी उसे अपने  पीछे  4-5 लोग अपनी ही तरफ आते दिखे तो चैन की सांस ली कि चलो अब सड़क सूनी नही है। लेकिन ये क्या- उन्होंने तो अब फिकरे ही कसने शुरू कर दिए । कुछ समझ नही आ रहा था कि क्या करे कि तभी उसे एक पुलिस चौकी दिखाई दी।
वो तेज़ी से पुलिस चौकी में घुस गयी लेकिन..
लेकिन यही उसकी जिंदगी की सबसे बड़ी भूल थी।
**पंकज दर्पण अग्रवाल, मुरादाबाद

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