रविवार, 8 मई 2022

मुरादाबाद मंडल के हसनपुर (जनपद अमरोहा ) निवासी साहित्यकार मुजाहिद चौधरी की रचना ---


"मां तेरी मोहब्बत सी मोहब्बत नहीं देखी l 

ममता की कोई दूसरी मूरत नहीं देखी ll

देखी है जमाने में हसीनाएं बहुत सी l

दुनिया में तेरी सी कोई सूरत नहीं देखी ll.......

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" वह जिंदगी से मेरी कुछ ऐसे चले गए l 

सारे जहां ने रोका मगर वह चले गए l l 

कैसे सफर पर निकले कोई साथ ही नहीं l 

सामान कुछ लिया नहीं तनहा चले गए l l 

बादल को इंतकाल की जैसे खबर हुई l 

तुम जिस जगह से गुजरे वह रो कर चले गए l l 

पहले तो आंख में कभी आने न दी नमी l 

आखिर में सबकी आंखें भिगो कर चले गए l l 

जाना ही था तो इतना हमें प्यार क्यों दिया l 

फिर क्यों हमें ही गम में डुबो कर चले गए l l 

अब उनकी मगफिरत को दुआगो  हैं हम सभी l 

 ताउम्र जो दुआएं हमें दे कर चले गए l l 

 कैसे मनाएं खुशियां तुम्हारे बगैर हम l 

खुशियां हमारी साथ में लेकर चले गए l l 

मुजाहिद  ने जब यह दर्द सरे बज्म कह दिया l 

आंखों में सारे अश्कों को लेकर चले गए l l 

✍️ मुजाहिद चौधरी

हसनपुर, अमरोहा 


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