रविवार, 28 मार्च 2021

मुरादाबाद के साहित्यकार अशोक विश्नोई का गीत -------ले हाथ आज पिचकारी, रंग दी साजन ने सारी




ले हाथ आज पिचकारी,

रंग दी साजन ने सारी।

मैं इकली बेचारी,

यूँ लाख सुनाई गारी ।

नहीं आज की बात-

सजन से बार बार में हारी।

ले हाथ ---------------------।।

अपने जैसा कर डाला ,

हा! ज़रा न देखा भाला।

वो दिया प्रेम का प्याला,

कर दिया मुझे मतवाला।

सखियां देती हैं उलाहने,

कितनी है लाचारी।

ले हाथ -----------------।।

आया लेके जो गुलाल,

खुश हो के मुझ पर डाल।

रंगों से कर दे मुझको लाल,

अरमां दिल के सभी निकाल।

इतना रंग दे आज बलम तू ,

देखे दुनिया सारी।

ले हाथ -------------।।

कितना अच्छा मेरा भाग,

साजन के साथ खेलती फ़ाग।

सोये अंग उठे हैं जाग,

सुना दे कोई मीठा राग।

तू है कृष्ण कन्हैया जैसा,

मैं राधा सी प्यारी।

ले हाथ--------------।।

✍️ अशोक विश्नोई, मुरादाबाद

                   

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