गुरुवार, 14 मई 2020

मुरादाबाद के साहित्यकार प्रवीण राही की लघु कथा ------ नारी सशक्तिकरण


मानसी त्यागी बहुचर्चित, सुप्रसिद्ध लेखिका है। अभी कल की ही बात है, अपनी किताब "नारी सशक्तिकरण" के लिए साहित्य अकादमी से नवाजी गई हैं।
मानसी के पति आलोक सफल व्यवसाई हैं। व्यवसाय के क्षेत्र में उन्होंने कई बार अवार्ड लिया है।
मानसी के मोबाइल पर एक कॉल आता है
.... हैलो , हेलो मैम....जी बताएं, कौन?
मैम बधाई,मै सूरज बोल रहा हूं....
आपके सम्मान में हमने कल एक कार्यक्रम आयोजित किया है।
आप आए और अपने अनुभव को युवा पीढ़ी के साथ साझा करे....मैम आप अपने पति को भी लाए,सम्मान हमने आपके पति से दिलवाने को सोचा है।
कल सुबह 9 बजे मैम ।
जी भाई ,बिल्कुल,मै समय पर आ जाऊंगी।
रात होते ही खुशी से झूम रही मानसी ने अपने पति से कहा..... आप सुनकर खुश हो जाएंगे,कल मेरा सम्मान समारोह है। और यह सम्मान आपके द्वारा ही देने का निर्णय लिया गया है।
आप साथ चलेंगे ना.....
आलोक-  मैंने कई बार कहा, यह लिखना बंद करो ₹25000 की पुरस्कार से ज्यादा खुश ना हो। मेरे साथ काम कर लेती तो अच्छी खासी आमदनी हो जाती, पर लिखने की ज़िद...
मुझे फुर्सत नहीं है मेरा कल एक बिजनेस डील है...
और हां याद रखना समय पर घर आ जाना। कल रात मेरे 4-5 दोस्त घर आएंगे,खाना बनाकर रखना .....स्वादिष्ट
। आलमिरे में ऊपर के हिस्से में शराब की बोतल है,वो भी ग्लास में हमें  देना।
अब सो जाओ,मुझे जल्दी काम पर जाना है....उदास मानसी
समझ नहीं पा रही थी क्या कहे क्या नहीं....पूरी रात यही सोचती रही "नारी सशक्तिकरण "पर लिखी किताब और उसका सम्मान सब बेमानी सा लग रहा है.............
प्रवीण राही

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