शनिवार, 24 जुलाई 2021

मुरादाबाद के साहित्यकार डॉ पुनीत कुमार की कविता ----गुरु की तलाश


 हमने एक

सड़क छाप ज्योतिषी को

अपनी जन्म कुण्डली दिखाई

उसने गम्भीरता पूर्वक

येे बात बताई

तुम्हारी कुण्डली में

गुरु का स्थान खाली है

लगता है गुरु तुमसे नाराज़ है

किसी गुरु के शरणागत हो जाओ

यही इसका एकमात्र इलाज है


हमने उसकी बात

दिल से लगा ली

गुरु की तलाश में

चारों ओर दृष्टि डाली

इंटरनेट पर उपलब्ध

सारी जानकारी खंगाली

किस गुरु की पोस्ट पर

कितने लाइक हैं

कितने हैं फॉलोअर

कितने और कैसे कमेंट्स हैं

समाज के किस वर्ग में है पॉपुलर

जो गुरु ज्यादा डिमांड मेेें थे

कुछ जेलों में बंद थे

कुछ रिमांड मेेें थे

कुछ गुरुओं के उपदेश

ऑनलाइन उपलब्ध थे

लेकिन उनके महंगे

और उलझाऊ अनुबंध थे

हमारी मध्यम वर्गीय मानसिकता ने

हम में भर दी हताशा

डिस्काउंट के चक्कर में

गुरुओं की सेल का समाचार

हमने हर जगह तलाशा

हमने सोचा

सस्ता मिल जाए तो

सेकेंड हैंड गुरु से भी

काम चला लेंगे

जैसे तैसे उसका खर्चा उठा लेंगे

लेकिन गारंटी देने को

कोर्इ नहीं था तैयार

सबने लिख कर लगा रखा था

फैशन के दौर में

गारंटी की बात करना है बेकार

हम इसी सोच मेेें थे डूबे

अचानक हमको मिल गए

पूंजीपति मित्र दूबे

बोले

हर तरह के गुरुओं को

अपनी जेब में रखता हूं

तुम चाहो तो एक दो को

तुम्हारी जेब में भर सकता हूं

हमको उनका प्रस्ताव

बिल्कुल नहीं जंचा

हमको लगा

अपनी कमजोर जेब में

भारी भरकम गुरुओं को

सम्भाल नहीं पाऊंगा

और बड़े मित्र का बड़ा अहसान

जिन्दगी भर उतार नहीं पाऊंगा

इसी ऊहापोह में

एकदिन अचानक

स्वप्न मेेें भगवान पधारे

बोले वत्स

बेकार की बातों में

खुद को मत उलझा रे

तू जिन्हें ढूंढ रहा है

वो गुरु नहीं गुरु घंटाल हैं

अपने शिष्यों के पैसों से

मालामाल हैं

तेरा गुरु,तेरे अंदर है

बस उसको मानना है,पहचानना है

उसे पाने का एकमात्र मार्ग

ध्यान है,धारणा है,साधना है

जिस दिन तुम्हारे अंदर का

गुरु जाग जायेगा

तुमको हर व्यक्ति में

गुरु नजर आएगा

प्रकृति का हर कण

तुमको कुछ ना कुछ सिखाएगा

पृथ्वी सहनशीलता सिखायेगी

फूल मुस्काना

फलों से लदे पेड़ सिखायेंगे

विनम्र होकर झुक जाना

सूरज और चन्दा

बिना किसी भेदभाव के

काम करना सिखायेंगे

नदी और समुंदर

शोषण के बजाय

पोषण का पाठ पढ़ाएंगे

समय सिखायेगा

हमेशा गतिमान रहना

क्या अब भी

किसी और गुरु की जरूरत है

हृदय पर हाथ रख

सच सच कहना,सच सच कहना।


✍️ डाॅ पुनीत कुमार, मुरादाबाद 244001

M 9837189600

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