गुरुवार, 2 अप्रैल 2020

मुरादाबाद मंडल के जनपद अमरोहा निवासी साहित्यकार मुजाहिद चौधरी की कहानी --बेजुबान कुत्ते


लॉक डाउन के कारण मनीष कई दिन से अपने घर में था,ना वह खुद बाहर निकल रहा था और ना ही अपने परिवार के किस सदस्य को उसने बाहर निकलने दिया था । उसने मंदिर जाना भी छोड़ दिया था और पूजा-पाठ भी वह घर पर ही करता था ।           नौदुर्गे में पूरे व्रत रखने वाला मनीष एक साधारण सा इंसान था । एक दो बार जरूरत का सामान उसने अपने घर के सामने ही आए हुए ठेले वालों से खरीद लिया था । वह अक्सर मोहल्ले के युवाओं से सड़क पर ना आने और घर के बाहर खड़े ना होने की निरंतर अपील भी करता रहता था ।
    आज घर में ब्रेड नहीं थी, जब उसकी पत्नी सुनीता ने उसको ब्रेड लाने के लिए कहा,तो मनीष बाहर ब्रेड लेने चला गया ।जैसे ही वह घर से बाहर निकला मनीष को मौहल्ले के 3-4 कुत्तों ने घेर लिया । मनीष डर रहा था, कोई कुत्ता उसको काट नहीं रहा था,लेकिन वह उसको आगे जाने भी नहीं दे रहे थे । कुत्ते बार-बार खड़े हो जाते और मनीष के चारों ओर चक्कर काट रहे थे, मनीष की समझ में नहीं आ रहा था क्या करे ? तभी सामने देख रहे दुकानदार सलीम ने मनीष को आवाज देकर कहा कि कुत्ते भूखे हैं,और ये आपसे कुछ खाने को मांग रहे हैं । आप आहिस्ता आहिस्ता आ जाइए और मनीष आहिस्ता आहिस्ता सलीम की दुकान तक पहुंच गया और दुकान से ग्लूकोज बिस्किट का पैकेट लेकर जैसे ही कुत्तों को डाला, वे बिस्किट बड़े प्रेम से खाने लगे और जब पैकेट खत्म हो गया तो बिना कुछ कहे वहां से चले गए ।
   अब जब भी मनीष घर से बाहर निकलता, वे सारे कुत्ते मनीष के पैरों में लोटने लगते और मनीष भी  अपनी जेब में बिस्किट का पैकेट लेकर ही निकलता,शायद मनीष बेजुबानों का दर्द समझने लगा था,और बेजुबान कुत्ते भी मनीष के प्यार को पहचानने लगे थे । मनीष सोचता काश देश और दुनिया भर में सांप्रदायिकता और आतंकवाद फैलाने वाले जातिवाद धर्मवाद की लड़ाई लड़ने वाले इंसान बेजुबानों की इन भावनाओं को समझ पाते ...

***मुजाहिद चौधरी
हसनपुर
जनपद अमरोहा
उत्तर प्रदेश, भारत

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