गुरुवार, 4 जून 2020

मुरादाबाद की साहित्यकार इंदु रानी की कहानी ----आपदा और मजदूर


आज पैदल चलते चलते सफर का तीसरा दिन था ।मजदूर भीमा और उसकी पत्नी अपने बच्चों के साथ थक कर चूर हुए जा रहे थे तभी अचानक कुछ दूरी पर एक पेड़ दिखा जिसके चबूतरे पर कुछ पल रुक कर आराम करने की इच्छा से वे रुक गए।
भीमा ने एक उम्मीद से अपने परिवार को देखा कि बस अब ज्यादा नही सिर्फ कुछ दिन और फिर हम अपने घर होंगे अपने सब लोगों के बीच और उसकी पत्नी ने पसीना पोंछ कर मुस्कुराते हुए मानो हामी भरी।
ठीक तभी बड़ी बेटी पूछ पड़ी "माँ और अभी कितने दिन? कब तक चलेंगे?"
माँ ने सर पर हाथ फेरते हुए बोला अब ज्यादा नही बेटा आने ही वाले हैं..चल कुछ खा ले और पूरी अचार थैले से निकाल उसे दे दिया।
पूरा परिवार वहीं लेट गया बच्चे सो गए तभी बच्चों पर तरस खाती माँ ने बुदबुदाया- "इतने मासूम बच्चे तीन दिन से संग बराबर चल रहे का कोई और चारा नही है का? सब तो बतियाई रहे सरकार बहुत मद्दद कर रही इस आपदा मा...राहत कोष मा सब लोगन से मदद आई रहे...का हमरे ख़ातिन कुछू नाही.."।
  "अरी पगली तुमका का मालूम बेफालतू बक-बक करती, जिसके लिए है उसके लिए ना, हमार तुम्हार  जैसन को थोड़ी...। रही तो थी ना वहां भी इतने दिन लॉक डाउन मा? कितना भर पेट खाने मिला? कितनी मदद मिली? आखिर परेशानी तो उहां भी झेले ना...। जा आराम कर फिर चलना है....लगी दिमाग खराब करने.."।
बेचारी करवट ले कर चुप-चाप निरुत्तर हो पड़ी रही पर दिमाग मे घूम रहा था वो सब समय जब वो हर जरूरी और छोटी-छोटी चीज को तरसती हुई गाय-भैस का गोबर पानी कर गाँव मे जीवन बिताया करती और पति से संग शहर ले जाने को लड़ती थी। चलो एक बार फिर वही सब पर कम से कम ये दिन तो न देखने पड़ेंगे के अपने संग बच्चे भी मुसीबत झेलें। रह लूँगी मैं फिर सर्फ, साबुन,शैम्पू,नून,तेल लकड़ियां की परेशानी को झेलती हुई पर मेरे बालक तो कम से कम खेल-खा के खुश रहेंगे। सोचते सोचते ही वक़्त बीत गया और अब फिर से चलने की तैयारी।

सफर का पाँचवा दिन और मंजिल बहुत करीब पर बच्चों के पैरों की मांसपेशियां अकड़ जाने के कारण वे ठीक से चल पाने मे असमर्थ थे भीमा बच्चों को हौसला देता गया हिम्मत रखने की पर छोटा बेटा दर्द से बेचैन हो रोने लगा। बच्चे की परेशानी ज्यादा होती देख वह अटैची,गठरिया साइड मे रख कर वहीं आनन-फानन मे बैठ कर हाथों से उसके पैरों की अकड़ जल्दी-जल्दी मसल कर ठीक करने के उद्देश्य से लग गया और सबका ध्यान रोने के कारण उसकी ओर ही रहा इतने में पीछे से आती चार पहिया वाहन भीमा को टक्कर मारती चली गयी और सबका ध्यान अचानक भंग हो गया। भीमा बुरी तरह जख्मी ठोकर खाए दूर पड़ा था उसकी पत्नी चीख गयी,बार बार उसके सर को गोद मे उठा मदद को चिल्लाती पुकारती रही पर पूरा भारत बंद था और सियासतें अंधी बहरी आपात कालीन स्थिती के चलते।😢😢


✍️ इन्दु रानी
मुरादाबाद 244001

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