बुधवार, 23 सितंबर 2020

मुरादाबाद के साहित्यकार वीरेंद्र सिंह बृजवासी की लघुकथा -----माफ करना भैया

         


तांगा एक आलीशान कोठी के सामने आकर रुक गया।सवारी उतरी और बैग लेकर कोठी के अंदर जाने लगी तभी तांगे वाले ने टोकते हुए कहा भाई साहब मेरे पैसे तो देते जाइये।सवारी ने दो हज़ार का नोट दिखाते हुए कहा भाई छुट्टे नहीं हैं, थोड़ा ठहरो अंदर से लाकर देता हूँ।सवारी बैग लेकर अंदर चली गई।

       तांगे वाले को खड़े-खड़े दस मिनट हो गए परंतु भाई साहब नहीं लौटे।शायद किसी काम में लग गए होंगे थोड़ी देर और देख लेता हूँ।आधा घंटा बीतने पर तांगे वाले ने घंटी का बटन दबाया और कुछ क्षण इंतज़ार किया।तभी दरवाज़ा खुला और वही सज्जन बाहर निकले ।तांगे वाले को देखकर अवाक रह गए और बोले  भाई मुझे माफ़ करना मैं अंदर जाकर कुछ काम में लग गया मुझे यह ध्यान ही नहीं रह कि तुम्हारे पैसे भी देने हैं।

     तुमने इतना इंतज़ार ही क्यों किया पहले ही घंटी बजा दी होती।जल्दी से तांगे वाले को पैसे देकर पुनः क्षमा मांगते हुए बोले भाई इसे दिल पर मत लेना।

         तांगे वाले ने भी सहजता पूर्वक कहा कोई बात नहीं भाई साहब ऐसा हो जाता है।आप बहुत अच्छे हैं सर,,,,कहते हुए 

तांगा लेकर चला गया।

        


                वीरेन्द्र सिंह ब्रजवासी

                  मुरादाबाद/उ,प्र,

                  9719275453

       दिनांक- 02/09/2020

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