शुक्रवार, 20 नवंबर 2020

मुरादाबाद के साहित्यकार अशोक विश्नोई की लघुकथा -- -----आदमी

   


 " मैंने पहले ही कहा था कि कुत्ता न पालो।आखिर काट ही लिया इसने! अब कराती रहो अपना इलाज ।" पति ने झुंझलाकर पत्नी से कहा।

      पत्नी ने उत्तर दिया,"तो क्या हुआ ! आदमी तो हर पल काटता रहता है, कुत्ते के काटे का तो इलाज हो सकता है।परंतु आदमी के काटे का कोई इलाज़ ही नहीं है। यह आदमी से तो अच्छा है।भले ही कुत्ता है ।

✍️ अशोक विश्नोई,मुरादाबाद

मो० 9411809222

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