रविवार, 6 जून 2021

मुरादाबाद के साहित्यकार अशोक विद्रोही की कुण्डलिया ---वनस्पति ,जंतु जगत, जलवायु मिल जाय, इन सबका संतुलन ही, पर्यावरण कहाय।।


वनस्पति ,जंतु जगत,

         जलवायु मिल जाय।

इन सबका  संतुलन ही,

           पर्यावरण कहाय।।

पर्यावरण  कहाय ,  

       हरे मत  विरवे   काटो,

वन्य जगत के जीवों,

        को  भी जीवन बांटो।

विद्रोही जीवन   की  ,

          वर्ना    होय दुर्गति ।

 प्राणवायु हो शून्य , 

      यदि न रहे   वनस्पति।।


✍️ अशोक विद्रोही, मुरादाबाद

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